01जीरादेई से चंपारण
उनका जन्म बिहार के सीवान ज़िले के जीरादेई में हुआ। उन्होंने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में पढ़ाई की, विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में प्रथम आए, और पटना उच्च न्यायालय के प्रमुख वकील बने। 1917 में हज़ारों नील किसानों के बयान दर्ज करने में गांधीजी की सहायता के लिए वे चंपारण गए, और उनका जीवन बदल गया। असहयोग में वकालत छोड़ी और बिहार विद्यापीठ की स्थापना में हाथ बँटाया। जनवरी 1934 के बिहार भूकंप के बाद राहत का नेतृत्व किया और उसी वर्ष कांग्रेस अध्यक्ष रहे, फिर 1939 में बोस के त्यागपत्र के बाद, और 1947 में।
02संविधान सभा और राष्ट्रपति भवन
11 दिसंबर 1946 को वे संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए और 24 जनवरी 1950 को उन्होंने संविधान पर हस्ताक्षर किए। दो दिन बाद वे गणराज्य के पहले राष्ट्रपति बने, और 1952 तथा 1957 में फिर चुने गए; दो पूर्ण कार्यकाल पाने वाले वे अकेले राष्ट्रपति हैं। मई 1951 में प्रधानमंत्री नेहरू की आपत्ति के बावजूद वे पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में गए और वहाँ आस्था तथा उस पुनर्निर्माण की बात कही जिसे विध्वंस मिटा नहीं सका। मई 1962 में वे पद से निवृत्त हुए, उसी वर्ष भारत रत्न पाया, और 28 फ़रवरी 1963 को पटना के सदाक़त आश्रम में उनका देहांत हुआ।




