01स्टेशन पर दो हनुमान
गर्भगृह में हनुमान जी की दो मूर्तियाँ साथ-साथ हैं: एक मनोकामना पूरी करने वाले, एक संकट हरने वाले, संकटमोचन। रात की गाड़ियों से उतरे यात्री स्टेशन से सीधे सामने आकर उन्हें प्रणाम करते हैं, और मंगलवार और शनिवार को कतार सड़क तक पहुँच जाती है। रामनवमी पर भीड़ लाखों में गिनी जाती है और पूरी स्टेशन रोड बन्द कर दी जाती है। पुराने स्थान का पुनर्निर्माण 1980 के दशक से हुआ, और न्यास ने मन्दिर सँभाला।
02लड्डू और अस्पताल
मन्दिर का नैवेद्यम, दक्षिण से लाए गए रसोइयों द्वारा तिरुपति की रीति से बना लड्डू, लगभग हर दर्शनार्थी ख़रीदता है और पूरे बिहार में घर ले जाता है। चढ़ावे से महावीर कैंसर संस्थान, एक बाल अस्पताल और अन्य सेवाएँ चलती हैं, जिससे यह न्यास उत्तर भारत में मन्दिर-प्रबन्धन का आदर्श बना। लगभग चार दशक तक इसका नेतृत्व करने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी और संस्कृत विद्वान आचार्य किशोर कुणाल का दिसम्बर 2024 में देहान्त हुआ। न्यास अब पूर्वी चम्पारण में विराट रामायण मन्दिर बना रहा है।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 1980 का दशकपुराने स्थान को वर्तमान मन्दिर के रूप में फिर बनाया जाता है।
- दिसम्बर 2024न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल का देहान्त होता है।
पटना जंक्शन के मुख्य निकास के ठीक सामने; भोर से देर रात तक खुला, मंगलवार और शनिवार को लम्बी कतारें।




