यह क्या कहता है
हर खंड के शीर्ष पर मध्यमग्राम, षड्जग्राम जैसे राग का नाम है, उसके बाद स्वर-अक्षरों के समूह। अन्तिम पंक्ति कहती है कि ये रचनाएँ रुद्राचार्य के एक शिष्य राजा ने सात और आठ तार वाली वीणा बजाने वाले शिष्यों के लाभ के लिए बनाईं। अनेक विद्वान इसे पल्लव राजा महेन्द्रवर्मन प्रथम की रचना मानते हैं।
यह भारत की सबसे पुरानी बची हुई लिखित संगीत-लिपि है, पत्थर पर उत्कीर्ण।










