चित्र: Kevin Standage (kevinstandage1@googlemail.com) INDIAN TRAVEL · CC BY-SA 2.0
शिलालेख · लगभग ई.पू. दूसरी–पहली शताब्दी

खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख

प्राप्ति
भुवनेश्वर के पास उदयगिरि पहाड़ी की हाथीगुम्फा का छज्जा; 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पहली बार पढ़ा
अब कहाँ
अपने स्थान पर, सुरक्षा-छत के नीचे

प्राकृत और ब्राह्मी में सत्रह पंक्तियाँ, जो कलिंग के जैन सम्राट खारवेल के शासन का वर्ष-दर-वर्ष लेखा देती हैं।

यह क्या कहता है

आरम्भ अर्हतों और सिद्धों को नमस्कार से होता है। खारवेल अपनी राजधानी की प्राचीरों की मरम्मत करता है, एक नन्दराज द्वारा खुदवाई गई नहर को आगे बढ़ाता है, उत्तर के राजाओं को हराता है, मगध के शासक को झुकाता है, और वह जिन-प्रतिमा वापस लाता है जिसे एक नन्दराज कलिंग से ले गया था। इसमें ‘भरधवस’ अर्थात् भारतवर्ष शब्द आया है।

यह क्या सिद्ध करता है

भारतवर्ष का नाम लेने वाला यह सबसे पुराना अभिलेख है, और यह कलिंग पर नन्द शासन की पुष्टि दूसरे पक्ष की ओर से करता है।

इनका प्रमाण