चित्र: पाटलिपुत्र (Patna) · Public domain
शिलालेख · लगभग 258 ई.पू. (अशोक के अभिषेक के दस वर्ष बाद)

अशोक का कन्धार द्विभाषी अभिलेख

प्राप्ति
अफ़ग़ानिस्तान के पुराने कन्धार में चेहल ज़ीना की चट्टान पर; 1958 में मिला
अब कहाँ
चेहल ज़ीना की चट्टान पर; दशकों के युद्ध के बाद उसकी वर्तमान दशा अनिश्चित है

अशोक का धम्म-सन्देश, जो उसके साम्राज्य के पश्चिमी छोर पर बसी यूनानी और फ़ारसी बोलने वाली प्रजा के लिए यूनानी और अरामी में खुदवाया गया।

यह क्या कहता है

यूनानी पाठ यों आरम्भ होता है: ‘दस वर्ष पूरे होने पर राजा पियोदस्सेस (प्रियदर्शी) ने मनुष्यों को धर्मभाव दिखाया।’ आगे लिखा है कि राजा जीवों की हत्या से दूर रहता है, राजा के शिकारी और मछुआरे यह काम छोड़ चुके हैं, और लोग माता-पिता तथा बड़ों की आज्ञा मानने लगे हैं। ‘धम्म’ के लिए यूनानी शब्द ‘यूसेबिया’ (धर्मनिष्ठा) रखा गया है।

यह क्या सिद्ध करता है

यह दिखाता है कि मौर्य शासन अराकोसिया (कन्धार) तक था, और अशोक वहाँ की प्रजा से उनकी अपनी भाषाओं में बात करता था।

इनका प्रमाण