
मीराबाई
लगभग 1498 – लगभग 1547 ई. · मेड़ता और चित्तौड़ (राजस्थान), वृंदावन, द्वारका · राजस्थानी (मारवाड़ी) और ब्रज, गुजराती पदों सहित
मीराबाईमीरा मेड़ता की राठौड़ राजकुमारी थीं, राव दूदा की पौत्री, और हर भक्त-चरित्र में कही जाने वाली कथा उनके बचपन से शुरू होती है: कृष्ण की एक छोटी मूर्ति पाकर उन्होंने गिरधर गोपाल को पति मान लिया और फिर कभी नहीं बदलीं। उनका विवाह मेवाड़ के राजघराने में राणा सांगा के पुत्र भोजराज से हुआ, और वे युवावस्था में ही विधवा हो गईं। उन्होंने सती होना स्वीकार नहीं किया और साधुओं की संगति में कृष्ण के आगे गाना-नाचना नहीं छोड़ा; उनके पद दरबार के क्रोध की बात कहते हैं: राणा का भेजा विष का प्याला जिसे वे हँसते हुए पी गईं, पिटारी का साँप जो माला बन गया। परंपरा संत रैदास को उनका गुरु बताती है। वे चित्तौड़ छोड़कर वृंदावन गईं, जहाँ एक प्रसिद्ध कथा में उनकी भेंट जीव गोस्वामी से होती है, और अंत में द्वारका पहुँचीं। कथा के अनुसार वहाँ जब मेवाड़ से उन्हें लौटाने दूत आए, वे रणछोड़जी के मंदिर में गईं और फिर दिखाई नहीं दीं; वे अपने प्रभु में समा गईं। उनके पद लिखे कम और गाए अधिक गए, इसलिए राजस्थानी, ब्रज और गुजराती में सैकड़ों पद अनेक पाठभेदों के साथ मिलते हैं। उनका स्वर सीधा और निजी है: प्रेम में डूबी स्त्री जो लज्जित होने को तैयार नहीं, जो गोविंद को तराज़ू पर तौलकर खुले बाज़ार में मोल लेती है।
रचनाएँ
- पदावली (मौखिक परंपरा से संकलित पद)
हर भजन
पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥
पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो
मीराबाई · राजस्थानीश्रीकृष्णमेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई। जाके सिर है मोरपखा मेरो पति सोई॥
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई
मीराबाई · राजस्थानीश्रीकृष्णहे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय। घायल की गति घायल जाणै जो कोई घायल होय॥
हे री मैं तो प्रेम-दिवानी
मीराबाई · राजस्थानीश्रीकृष्णपग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे। मैं तो मेरे नारायण की आपहि हो गई दासी रे॥
पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे
मीराबाई · राजस्थानीश्रीकृष्णबसो मोरे नैनन में नंदलाल। मोहनी मूरति साँवरि सूरति नैणा बने बिसाल॥
बसो मोरे नैनन में नंदलाल
मीराबाई · ब्रजविष्णुहरि तुम हरो जन की भीर। द्रोपदी की लाज राखी तुम बढ़ायो चीर॥
हरि तुम हरो जन की भीर
मीराबाई · ब्रजश्रीकृष्णस्याम मने चाकर राखो जी। गिरधारी लाला चाकर राखो जी॥
स्याम मने चाकर राखो जी
मीराबाई · राजस्थानीश्रीकृष्णमाई मैनें गोविंद लीन्हो मोल॥ कोई कहे हलका कोई कहे भारी।