बसो मोरे नैनन में नंदलाल।
मोहनी मूरति साँवरि सूरति नैणा बने बिसाल॥
अधर सुधारस मुरली राजत उर बैजंती-माल।
छुद्र घंटिका कटि तट सोभित नूपुर सबद रसाल॥
मीरा प्रभु संतन सुखदाई भगत बछल गोपाल॥
Baso more nainan mein Nandlal,
mohani murati sanvari surati naina bane bisal.
Adhar sudharas murali rajat ur baijanti-mal,
chhudra ghantika kati tat sobhit nupur sabad rasal.
Mira prabhu santan sukhdai bhagat bachhal Gopal.
अर्थ
हे नंदलाल, मेरी आँखों में बस जाओ: मन मोह लेने वाली मूर्ति, साँवली सूरत और बड़े-बड़े नेत्र।
अमृत-रस भरे होंठों पर मुरली सुशोभित है, छाती पर वैजयंती माला है। कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा दे रही हैं और पायल की मधुर ध्वनि हो रही है।
मीरा के प्रभु गोपाल संतों को सुख देने वाले और भक्तों से प्रेम करने वाले हैं।
इस भजन के बारे में
यह दर्शन का गीत है: मीरा सिर से पाँव तक कृष्ण का वर्णन करती हैं, नेत्र, होंठ, मुरली, माला, कमर की घंटियाँ, पायल, और विनती करती हैं कि वे उनकी आँखों में बस जाएँ ताकि देखना कभी रुके नहीं। मंदिरों में श्रृंगार दर्शन के समय, जब ठाकुर जी को अभी-अभी सजाया गया हो, पर्दा खुलते ही यह गाया जाता है। इसकी भाषा मीरा की मारवाड़ी से अधिक ब्रज की ओर झुकी है, जैसा उनके बहुत से पद उत्तर भारत तक पहुँचे रूप में हैं।
Meera padavali; text as on Kavita Kosh
