
आदि शंकराचार्य
आम्नाय मठों की गणना से 509–477 ई.पू.; एक अन्य प्रचलित गणना से 788–820 ई. · कालड़ी, केरल; पूरे भारत की यात्रा · संस्कृत
आदि शंकराचार्यशंकर का जन्म केरल के कालड़ी गाँव में पूर्णा नदी के तट पर हुआ, जिसे आज पेरियार कहते हैं। पिता शिवगुरु, माता आर्याम्बा। पिता बचपन में ही चल बसे। बालक संन्यास चाहता था और माता अनुमति नहीं देती थीं, जब तक एक दिन नदी में मगर ने उसका पैर नहीं पकड़ लिया। मृत्यु से पहले संन्यास की अनुमति माँगी, माता ने दी, और मगर ने पैर छोड़ दिया। शंकरदिग्विजय यही कथा कहता है। वे पैदल नर्मदा के तट पहुँचे और गुरु गोविन्द भगवत्पाद के चरणों में गौडपाद की परंपरा का अद्वैत सीखा।
परंपरा के अनुसार सोलह वर्ष की आयु तक उन्होंने ब्रह्मसूत्र, प्रमुख उपनिषदों और भगवद्गीता पर भाष्य लिख दिए थे। फिर वे पूरे भारत में घूमे; काशी में, माहिष्मती में मण्डन मिश्र और उनकी पत्नी उभय भारती से, कश्मीर में शारदा पीठ पर शास्त्रार्थ किया। उन्होंने शृंगेरी, द्वारका, पुरी और ज्योतिर्मठ में चार आम्नाय मठ स्थापित किए; कांची कामकोटि पीठ भी अपनी परंपरा उन्हीं से जोड़ता है। बत्तीस वर्ष की आयु में उन्होंने देह त्यागी; केदारनाथ में उनकी समाधि है।
जिस आचार्य ने सिद्ध किया कि केवल ब्रह्म सत्य है, उन्हीं ने भगवान के हर रूप के लिए स्तोत्र रचे: गणेश, शिव, देवी, विष्णु, अन्नपूर्णा, कालभैरव। उनके लिए ज्ञान और भक्ति में कोई विरोध नहीं था। भक्ति मन को शुद्ध करती है; शुद्ध मन एक आत्मा को देखता है। संध्या के समय जो घर भज गोविन्दम् गाता है, वह उनका उपदेश सबसे सरल रूप में गा रहा है।
रचनाएँ
- ब्रह्मसूत्र, प्रमुख उपनिषदों और भगवद्गीता पर भाष्य
- उपदेशसाहस्री
- भज गोविन्दम् (मोहमुद्गर)
- सौन्दर्यलहरी, शिवानन्दलहरी
- कनकधारा स्तोत्र, निर्वाणषट्कम्, शिवपञ्चाक्षर स्तोत्र और अनेक अन्य स्तोत्र
हर भजन
भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढमते ।
भज गोविन्दम् (मोहमुद्गर)
आदि शंकराचार्य · संस्कृतविष्णुअच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् ।
अच्युताष्टकम्
आदि शंकराचार्य · संस्कृतशिवनागेन्द्रहाराय विलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
शिवपञ्चाक्षर स्तोत्र
आदि शंकराचार्य · संस्कृतनिर्गुणमनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे ।
निर्वाणषट्कम् (आत्मषट्कम्)
आदि शंकराचार्य · संस्कृतदेवीअङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम् ।
कनकधारा स्तोत्र
आदि शंकराचार्य · संस्कृतगणेशमुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् ।
गणेश पञ्चरत्नम्
आदि शंकराचार्य · संस्कृतशिवदेवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् ।
कालभैरवाष्टकम्
आदि शंकराचार्य · संस्कृतदेवीनित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी ।
अन्नपूर्णा स्तोत्र (अन्नपूर्णाष्टकम्)
आदि शंकराचार्य · संस्कृतशिवरत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनम् ।
शिवमानसपूजा
आदि शंकराचार्य · संस्कृतदेवीशिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं न चेदेवं देवो न खलु कुशलः स्पन्दितुमपि ।
सौन्दर्यलहरी (चुने हुए श्लोक)
आदि शंकराचार्य · संस्कृतगुरुशरीरं सुरूपं तथा वा कलत्रं यशश्चारु चित्रं धनं मेरुतुल्यम् ।
गुर्वष्टकम्
आदि शंकराचार्य · संस्कृतदेवीन तातो न माता न बन्धुर्न दाता न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता ।