चित्र: Nripendra Singh 1976 · CC BY-SA 4.0
उत्खनन · लगभग 2000–1800 ई.पू. (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का अनुमान); उत्खनन 2018

सिनौली के रथ-शवाधान

प्राप्ति
सिनौली, बागपत ज़िला, उत्तर प्रदेश; शवाधान-स्थल पहली बार 2005–06 में खोदा गया, फिर 2018 में एस. के. मंजुल के नेतृत्व में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा
अब कहाँ
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास

ऊपरी गंगा–यमुना दोआब के योद्धा-शवाधान, जिनमें तीन पहिएदार वाहन, ताँबे की पत्तियों से मढ़े ताबूत, तलवारें और एक शिरस्त्राण रखे मिले।

यह क्या कहता है

2018 की खाइयों में पायों वाले लकड़ी के ताबूत मिले जिन पर ताँबे की सजावट थी, साथ में ऐंटीना-मूठ वाली ताँबे की तलवारें, कटार, ढालें, ताँबे का शिरस्त्राण, मनके और मिट्टी के बर्तन। क़ब्रों में तीन दो-पहिया वाहन थे, जिनके ठोस पहिए ताँबे के त्रिकोणों से मढ़े थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इन्हें रथ कहता है; कुछ पुरातत्वविद इन्हें ‘गाड़ी’ कहना ठीक मानते हैं, क्योंकि पहिए ठोस हैं, आरों वाले नहीं। 2005–06 में पास की खुदाई में 116 शवाधान पहले ही मिल चुके थे।

यह क्या सिद्ध करता है

यह लगभग 2000 ई.पू. में गंगा–यमुना दोआब में पहिएदार युद्ध-वाहन, तलवारें और कवच रखता है, उस भूमि में जिसे महाभारत कुरु-देश के रूप में जानता है।

इनका प्रमाण