यह क्या कहता है
कूँड़ों के दो समूह समकोण पर एक-दूसरे को काटते हैं। एक समूह पूर्व–पश्चिम लगभग 30 सेंटीमीटर के अन्तर पर है; दूसरा उत्तर–दक्षिण लगभग 2 मीटर के अन्तर पर। उसी ज़िले के किसान आज भी एक खेत में दो फ़सलें बोने के लिए ऐसे ही जोतते हैं, चौड़ी कतारों में ऊँची फ़सल और सँकरी में नीची।
यह दिखाता है कि लगभग पाँच हज़ार वर्ष पहले सरस्वती के मैदान में हल चलता था, और खेती का एक ढंग जो तब से नहीं बदला।










