चित्र: Mohitnarayanan · CC BY-SA 3.0
उत्खनन · विकसित हड़प्पा, लगभग 2500–2000 ई.पू.; उत्खनन 1961–69

कालीबंगा की अग्नि-वेदियाँ

प्राप्ति
कालीबंगा, राजस्थान के दुर्ग में ईंटों के चबूतरे और घरों में अग्नि-कुंड; बी. बी. लाल और बी. के. थापर का उत्खनन
अब कहाँ
अपने स्थान पर

ईंटों के ऊँचे चबूतरों पर मिट्टी से लिपे छोटे अग्नि-कुंडों की पंक्तियाँ, जिनके पास एक कुआँ और स्नान के फ़र्श थे।

यह क्या कहता है

दक्षिणी दुर्ग के एक चबूतरे पर सात अग्नि-कुंड एक पंक्ति में थे, जिनमें राख और कोयला था; कुछ के बीच में मिट्टी का एक स्तम्भ था और पास में पशुओं की हड्डियाँ। पास ही एक कुआँ और पक्के स्नान-स्थल थे। निचले नगर के कई घरों में अपना अलग अग्नि-कुंड था। ऐसे ही कुंड लोथल और बनावली में भी मिले।

यह क्या सिद्ध करता है

बी. बी. लाल ने इन्हें अग्नि-अनुष्ठान की वेदियाँ माना, जहाँ पूजा से पहले स्नान होता था, वह रीति जो आज भी वैदिक यज्ञ और हिन्दू घर की पहचान है।

इनका प्रमाण