चित्र: Ashish_Premier · CC BY-SA 3.0
उत्खनन · लगभग 7000–5500 ई.पू.; 2006 में प्रकाशित

मेहरगढ़ के छेदे गए दाँत

प्राप्ति
मेहरगढ़, कच्छी मैदान, बलूचिस्तान (पाकिस्तान) का नवपाषाणकालीन क़ब्रिस्तान; यह स्थल 1974 से ज़्याँ-फ़्रांस्वा जारिज के नेतृत्व में फ़्रांसीसी दल ने खोदा
अब कहाँ
मेहरगढ़ उत्खनन का कंकाल-संग्रह; वर्तमान संरक्षण-स्थान यहाँ पुष्ट नहीं

नौ वयस्कों की दाढ़ों के ग्यारह शिखर, जिनमें सधे हुए छेद किए गए थे, जीवित मनुष्यों पर दन्त-चिकित्सा का संसार में सबसे पुराना प्रमाण।

यह क्या कहता है

छेद गोल हैं, 1.3 से 3.5 मिलीमीटर चौड़े और 3.5 मिलीमीटर तक गहरे। उनके किनारों की घिसावट बताती है कि छेद के बाद भी लोग चबाते रहे, यानी यह काम उनके जीवित रहते हुआ। उसी गाँव में चकमक की नोकों से मनके छेदे जाते थे, और दाँत के वैद्य शायद मनका बनाने वालों की धनुष-बरमी ही काम में लाते थे।

यह क्या सिद्ध करता है

यह दिखाता है कि बोलन दर्रे की तलहटी के पहले किसान लगभग 9,000 वर्ष पहले कुशल चिकित्सा करते थे।

इनका प्रमाण