चित्र: নৰুনা বৰুৱা · CC BY 4.0
शिलालेख · सातवीं शताब्दी ई.

भास्करवर्मन के निधानपुर ताम्रपत्र

प्राप्ति
निधानपुर, सिलहट क्षेत्र (अब बांग्लादेश में); 1912 में मिले
अब कहाँ
एपिग्राफ़िया इंडिका खंड 12 में प्रकाशित; वर्तमान संरक्षण-स्थान यहाँ पुष्ट नहीं

हर्ष के मित्र, कामरूप के कुमार भास्करवर्मन के ताम्रपत्र, जो एक ऐसे भूमि-दान को फिर से पुष्ट करते हैं जिसके मूल पत्र जल गए थे।

यह क्या कहता है

उनके पूर्वज भूतिवर्मन द्वारा बहुत से वैदिक ब्राह्मणों को दिया गया दान फिर से पुष्ट किया गया। वंशावली कामरूप के राजाओं को नरक, भगदत्त और वज्रदत्त से जोड़ती है, वही वंश जिसे महाभारत प्राग्ज्योतिष का शासक बताता है।

यह क्या सिद्ध करता है

यह दिखाता है कि असम का कामरूप राज्य भारत के सुदूर पूर्व में वैदिक विद्या बसा रहा था और इतिहास के प्राग्ज्योतिष-राजाओं से अपना वंश जोड़ता था।

इनका प्रमाण