चित्र: SpeakingArch · CC BY-SA 4.0
शिलालेख · 739 ई. (कलचुरि संवत् 490)

अवनिजनाश्रय पुलकेशी के नवसारी ताम्रपत्र

प्राप्ति
दक्षिण गुजरात के नवसारी में, 19वीं शताब्दी में
अब कहाँ
पाठ वा. वि. मिराशी के कलचुरि-चेदि संवत् अभिलेख-संग्रह (1955) में सम्पादित

लाट के चालुक्य राजकुमार का भूमि-दान पत्र, जिसमें दर्ज है कि उसने दक्कन में घुसने की कोशिश करती अरब सेना को कैसे लौटाया।

यह क्या कहता है

अभिलेख कहता है कि ताजिकों (अरबों) ने तलवार से सैन्धव, कच्छेल्ल, सौराष्ट्र, चावोटक, मौर्य और गुर्जर राजाओं को तोड़ दिया था और दक्षिणापथ में घुसने की इच्छा से नवसारी प्रदेश लेने आए। पुलकेशी ने युद्ध में उन्हें हराया। उसके अधिपति चालुक्य राजा विक्रमादित्य द्वितीय ने उसे उपाधियाँ दीं, उनमें ‘अनिवर्तक-निवर्तयिता’ भी, अर्थात् ‘जो लौटाए न जा सकें उन्हें लौटाने वाला’।

यह क्या सिद्ध करता है

यह 730 के दशक में सिन्ध से हुए अरब आक्रमणों और दक्षिण गुजरात में उनकी हार का दिनांकित भारतीय अभिलेख है।

इनका प्रमाण