अरबों के विरुद्ध राजस्थान और गुजरात का प्रतिरोध

विजेतापश्चिमी भारत के राजानागभट प्रथम (प्रतिहार), अवनिजनाश्रय पुलकेशी (लाट के चालुक्य); मेवाड़ की परम्परा में बप्पा रावल
738 ई.बनाम
पक्षसिन्ध के उमय्यद हाकिमअल-जुनैद और उसके उत्तराधिकारी

सिन्ध के पतन के बाद अरब हाकिमों ने राजस्थान, मालवा और गुजरात में भीतर तक धावे मारे। पन्द्रह वर्ष के भीतर प्रतिहारों, लाट के चालुक्यों और उनके साथियों ने उन्हें सदा के लिए लौटा दिया।

तिथि: लगभग 725–739 ई.स्थान: पश्चिमी भारत: राजस्थान, मालवा और लाट (दक्षिण गुजरात); निर्णायक युद्ध नवसारी के पासप्रकार: अभियान
चित्र: SpeakingArch · CC BY-SA 4.0
परिणाम

अरब सेनाएँ पीछे धकेल दी गईं, और ख़िलाफ़त फिर कभी सिन्ध से आगे नहीं बढ़ सकी।

01धावे

अल-बलाज़ुरी उन स्थानों की सूची देता है जिन पर 720 के दशक में अल-जुनैद के सेनापतियों ने धावे मारे: मरमद, मण्डल, दहनज, बरवस यानी भरूच, उज्जैन, बैलमान यानी भीनमाल, और जुर्ज़ यानी गुर्जर देश। कुछ वर्ष ऐसा लगा कि पश्चिमी भारत भी सिन्ध की राह जाएगा। फिर पासा पलटा। अल-बलाज़ुरी स्वयं मानता है कि अल-जुनैद के उत्तराधिकारी के समय मुसलमान भारत के कई भागों से पीछे हटे और टिक न सके।

02नवसारी और ग्वालियर

चालुक्य राजकुमार अवनिजनाश्रय पुलकेशी के नवसारी ताम्रपत्र, जो 739 ई. के हैं, बताते हैं कि सैन्धव, कच्छेल्ल, सौराष्ट्र, चावोटक, मौर्य और गुर्जर राजाओं को कुचल चुकी ताजिक सेना ने दक्कन में घुसना चाहा और उनके हाथों नष्ट हुई। इसके लिए उन्हें 'अनिवर्तक-निवर्तयितृ', न लौटने वाले को लौटाने वाला, की उपाधि मिली। एक सदी बाद मिहिर भोज की ग्वालियर प्रशस्ति ने वंश के संस्थापक नागभट प्रथम की म्लेच्छों की सेनाओं को कुचलने के लिए प्रशंसा की। मेवाड़ के भाट इस यश का एक भाग बप्पा रावल को देते हैं; उनके समय का कोई अभिलेख इस युद्ध में उनका नाम नहीं लेता।

नागभट प्रथम
व्यक्तित्व · शासन लगभग 730–760 ई.नागभट प्रथमनागभट प्रथम ने गुर्जर-प्रतिहारों को पश्चिम के एक छोटे राज्य से बड़ी शक्ति बनाया, और सिन्ध के पतन के बाद राजस्थान और मालवा में घुस आई अरब सेनाओं को पीछे धकेला। उनके वंशजों ने आगे चलकर कान्यकुब्ज और लगभग पूरा उत्तर भारत अपने हाथ में रखा।पढ़ें →
महत्त्व

इन युद्धों ने ख़िलाफ़त को लगभग तीन सौ वर्ष तक सिन्ध और मुल्तान से आगे भारत में घुसने न दिया।