यह क्या कहता है
‘शाके तुरगयुग्मेशे मधुमासत्रयोदशे। कामरूपं समागत्य तुरुष्काः क्षयमाययुः॥’ अर्थात् शक 1127 में मधु (चैत्र) मास की त्रयोदशी को कामरूप में आए तुरुष्क नष्ट हो गए। वर्ष शब्द-संख्या में लिखा है।
यह कामरूप की ओर से वह पुष्ट करता है जो तबक़ात-ए-नासिरी भी मानती है: तिब्बत की ओर कामरूप से होकर गई बख़्तियार ख़िलजी की सेना नष्ट हो गई।










