चित्र: Pinakpani · CC BY 4.0
शिलालेख · शक संवत् 1127 (1205/06 ई.)

कानाई बरशी शिलालेख

प्राप्ति
ब्रह्मपुत्र के उत्तरी तट पर उत्तर गुवाहाटी के कानाई बरशी बोवा की चट्टान पर
अब कहाँ
अपने स्थान पर, उत्तर गुवाहाटी, असम

चट्टान पर खुदा एक श्लोक का संस्कृत अभिलेख, जो कहता है कि कामरूप में आए तुर्क नष्ट हो गए।

यह क्या कहता है

‘शाके तुरगयुग्मेशे मधुमासत्रयोदशे। कामरूपं समागत्य तुरुष्काः क्षयमाययुः॥’ अर्थात् शक 1127 में मधु (चैत्र) मास की त्रयोदशी को कामरूप में आए तुरुष्क नष्ट हो गए। वर्ष शब्द-संख्या में लिखा है।

यह क्या सिद्ध करता है

यह कामरूप की ओर से वह पुष्ट करता है जो तबक़ात-ए-नासिरी भी मानती है: तिब्बत की ओर कामरूप से होकर गई बख़्तियार ख़िलजी की सेना नष्ट हो गई।

इनका प्रमाण