चित्र: Shankar · Public domain
शासक

हेमू विक्रमादित्य

सूर सेनापति जिन्होंने 1556 में दिल्ली ली

1501 ई.—1556 ई.

1501–1556 ई.

रेवाड़ी के बाज़ारों से उठकर हेमू आदिल शाह सूर की सेनाओं के सेनापति बने, 1556 में मुग़लों से आगरा और दिल्ली छीनकर ‘विक्रमादित्य’ के रूप में अभिषिक्त हुए, और एक महीने बाद पानीपत के दूसरे युद्ध में गिरे।

01रेवाड़ी से सेनापति तक

हेमू रेवाड़ी के एक व्यापारी परिवार से थे। शेरशाह के पुत्र इस्लाम शाह के समय वे बाज़ार और रसद के अधीक्षक रहे, और आदिल शाह के समय प्रधानमंत्री तथा सेनापति बने। शत्रु पक्ष के लिए लिखने वाला अबुल फ़ज़ल भी मानता है कि पूर्व में आदिल शाह के अफ़ग़ान प्रतिद्वंद्वियों पर हेमू ने अनेक युद्ध जीते। जनवरी 1556 में हुमायूँ की मृत्यु हुई और बालक अकबर पंजाब में था; तब हेमू पश्चिम की ओर बढ़े, आगरा लिया और 7 अक्टूबर 1556 को दिल्ली के बाहर तुग़लक़ाबाद में मुग़ल हाकिम तर्दी बेग खाँ को हराया।

02विक्रमादित्य और पानीपत

दिल्ली में हेमू ने उज्जयिनी के प्राचीन सम्राट की उपाधि ‘विक्रमादित्य’ धारण की और सिक्के चलाए। 5 नवंबर 1556 को पानीपत में बैरम खाँ के नेतृत्व वाली अकबर की सेना से उनकी सेना भिड़ी। हेमू हाथी पर से लड़ रहे थे और युद्ध उनके पक्ष में जा रहा था, तभी एक तीर उनकी आँख में लगा। हौदा ख़ाली देखकर सेना बिखर गई। मूर्छित हेमू को मुग़ल शिविर लाकर उनका सिर काट दिया गया। बदायूँनी और अबुल फ़ज़ल दोनों यह अंत दर्ज करते हैं। इसके बाद दो सौ वर्ष से अधिक तक कोई हिंदू दिल्ली का स्वामी बनकर नहीं बैठा।

दिल्ली (इन्द्रप्रस्थ)
स्थान · पाण्डवों का इन्द्रप्रस्थ; लगभग 1052 में तोमर अनंगपाल का लालकोट; उसके बाद अनेक नगरदिल्ली (इन्द्रप्रस्थ)पाण्डवों का इन्द्रप्रस्थ यमुना-तट पर वहाँ था जहाँ आज पुराना क़िला है, और तोमरों तथा चौहानों ने महरौली में पहली परकोटे वाली दिल्ली बसाई। तब से इसी भूमि पर सात या अधिक नगर उठे।पढ़ें →