चित्र: Kushan Emperor Kanishka (2nd century CE) · Public domain
शिलालेख · कनिष्क का प्रथम वर्ष, लगभग 127 ई.

कनिष्क का रबातक अभिलेख

प्राप्ति
रबातक, बग़लान प्रांत, अफ़ग़ानिस्तान; 1993 में मिला
अब कहाँ
अफ़ग़ानिस्तान का राष्ट्रीय संग्रहालय, काबुल

बाख़्त्री भाषा में, यूनानी अक्षरों में लिखा पत्थर, जिसमें कनिष्क अपने पूर्वजों और अपने देवालय के देवताओं की सूची देता है।

यह क्या कहता है

कनिष्क अपने परदादा कुजुल कडफ़ाइसिस, दादा विम तक्षु और पिता विम कडफ़ाइसिस का नाम लेता है। वह देवी नना और उम्मा (उमा) तथा मिहिर आदि देवताओं की प्रतिमाएँ बनवाने का आदेश देता है, और कहता है कि उसका शासन साकेत, कौशाम्बी, पाटलिपुत्र और चम्पा तक गंगा के मैदान के नगरों पर था।

यह क्या सिद्ध करता है

इसने कुषाण राजाओं का क्रम तय किया और दिखाया कि कुषाण दरबार में उमा जैसी भारतीय देवियों का सम्मान होता था।

इनका प्रमाण