चित्र: Rashmi.parab · CC BY-SA 3.0
शिलालेख · लगभग दूसरी शताब्दी ई. (वासिष्ठीपुत्र पुलुमावि का 19वाँ वर्ष)

गौतमी बलश्री की नासिक प्रशस्ति

प्राप्ति
पाण्डवलेणी (त्रिरश्मि) गुफ़ाओं की गुफ़ा 3, नासिक, महाराष्ट्र
अब कहाँ
गुफ़ा की दीवार पर अपने स्थान पर

राजमाता गौतमी बलश्री बौद्ध संघ को एक गुफ़ा दान करती हैं और अपने पुत्र गौतमीपुत्र सातकर्णि की प्रशस्ति करती हैं।

यह क्या कहता है

गौतमीपुत्र को शकों, यवनों और पह्लवों का संहारक कहा गया है, जिसने क्षहरात वंश को उखाड़ा और सातवाहनों का गौरव लौटाया, और जिसके घोड़ों ने तीन समुद्रों का जल पिया। कहा गया है कि उसने चारों वर्णों के संकर को रोका।

यह क्या सिद्ध करता है

यह दूसरी शताब्दी ई. में पश्चिमी भारत के शक क्षत्रपों पर सातवाहनों की पुनर्विजय का लेखा है।

इनका प्रमाण