चित्र: Ms Sarah Welch · Public domain
शिलालेख · पहली शताब्दी ई. का आरम्भ

मोरा कूप अभिलेख

प्राप्ति
मथुरा से लगभग 11 किमी पश्चिम में मोरा गाँव के एक कुएँ की शिला पर; 19वीं शताब्दी में प्रकाश में आया
अब कहाँ
शिला और लूडर्स तथा बाद के विद्वानों द्वारा प्रकाशित पाठ से ज्ञात

ब्राह्मी लिपि में संस्कृत अभिलेख, जिसमें मथुरा के महाक्षत्रप राजुवुल के पुत्र के समय पाँच वृष्णि-वीरों की प्रतिमाओं के लिए पत्थर का मन्दिर बनवाने का उल्लेख है।

यह क्या कहता है

तोषा नाम की एक स्त्री ने पत्थर के देवगृह में ‘भगवान वृष्णियों के पाँच वीरों की प्रतिमाएँ’ (भगवतां वृष्णीनां पञ्चवीराणां प्रतिमाः) स्थापित कीं। ये पाँच संकर्षण, वासुदेव, प्रद्युम्न, साम्ब और अनिरुद्ध माने जाते हैं, जिनकी उपासना भागवत करते थे।

यह क्या सिद्ध करता है

यह पत्थर के मन्दिर और श्रीकृष्ण वासुदेव तथा उनके कुल की प्रतिमा-पूजा के सबसे पुराने अभिलेखों में से है, और वह भी स्वयं मथुरा में।

इनका प्रमाण