चित्र: Emperor Harsha (Harshavardhan) · Public domain
शिलालेख · 628 ई. (हर्ष संवत 22)

हर्ष का बांसखेड़ा ताम्रपत्र

प्राप्ति
बांसखेड़ा, शाहजहाँपुर ज़िला, उत्तर प्रदेश; 1894 में मिला
अब कहाँ
राज्य संग्रहालय, लखनऊ

दो ब्राह्मणों को दिया गया भूमि-दान, जिस पर सम्राट हर्ष के अपने हस्ताक्षर हैं।

यह क्या कहता है

इसके अन्त में लिखा है ‘स्वहस्तो मम महाराजाधिराज श्री हर्षस्य’, अर्थात् “मेरा अपना हाथ, महाराजाधिराज श्री हर्ष का”, सुन्दर बहती लिपि में। हर्ष के वंश को शिव, सूर्य और बुद्ध का भक्त बताया गया है।

यह क्या सिद्ध करता है

यह हर्ष के कुल के विषय में बाणभट्ट के हर्षचरित की पुष्टि करता है और सातवीं शताब्दी के एक सम्राट की लिखावट सहेजता है।

इनका प्रमाण