01मनु से इक्ष्वाकु तक
सूर्यदेव विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु हैं, जो इस मन्वन्तर के मनु हैं। मनु के ज्येष्ठ पुत्र इक्ष्वाकु ने अयोध्या पाई, और उनके बाद इस कुल का हर राजा ऐक्ष्वाक कहलाया। बालकाण्ड में सीता के विवाह के समय वसिष्ठ जी यह वंशावली सुनाते हैं: कुक्षि, विकुक्षि, बाण, अनरण्य और आगे की पीढ़ियाँ, ताकि जनक जान लें कि किसका पुत्र उनकी कन्या माँग रहा है। विष्णु पुराण और भागवत का नवम स्कन्ध यही कुल और विस्तार से देते हैं; कुछ नाम और उनका क्रम ग्रन्थ-ग्रन्थ में अलग मिलता है।
02वचन निभाने वाले राजा
युवनाश्व के पुत्र मान्धाता चक्रवर्ती के रूप में स्मरण किए जाते हैं। हरिश्चन्द्र ने विश्वामित्र को दिया वचन तोड़ने के बजाय राज्य, पत्नी, पुत्र और स्वयं को भी दे दिया। अश्वमेध का घोड़ा ढूँढते हुए सगर के साठ हज़ार पुत्र कपिल मुनि की दृष्टि से भस्म हुए, और उस भस्म पर गंगा को स्वर्ग से उतारने में तीन पीढ़ियाँ लगीं: अंशुमान, दिलीप और फिर भगीरथ। इसीलिए गंगोत्री से निकलती धारा भागीरथी कहलाती है।

03रघु, अज, दशरथ, राम
कालिदास का रघुवंश इस कुल की अन्तिम कड़ियों को राजा-दर-राजा कहता है: दिलीप, जिन्होंने वसिष्ठ की गौ नन्दिनी को बचाने के लिए अपना शरीर सिंह को सौंप दिया; रघु, जिनकी दिग्विजय से कुल का दूसरा नाम रघुकुल पड़ा; अज, जिन्होंने स्वयंवर में इन्दुमती को पाया; दशरथ; और त्रेतायुग में भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम। रामराज्य आगे के हर भारतीय राजा की कसौटी बना। उनके पुत्रों में कुश ने कुशावती और लव ने श्रावस्ती पाई; कुश बाद में अयोध्या लौट आए।
04कलियुग तक
श्रीराम के साथ यह कुल समाप्त नहीं हुआ। महाभारत में कोसल-नरेश बृहद्बल कुरुक्षेत्र में कौरवों की ओर से लड़ते हैं और अभिमन्यु के हाथों मारे जाते हैं। पुराण इस कुल को कलियुग में भी आने वाले राजाओं की सूची के रूप में आगे बढ़ाते हैं, और बुद्ध के मित्र कोसल-नरेश प्रसेनजित को ऐक्ष्वाकों में गिनते हैं। विष्णु और भागवत पुराण सूर्यवंश को सुमित्र पर समाप्त करते हैं। पालि ग्रन्थों में शाक्य कुल भी अपनी उत्पत्ति ओक्काक से बताता है, जो इक्ष्वाकु का पालि रूप है।

शासक
- 1वैवस्वत मनुविवस्वान के पुत्र; वंश के मूल पुरुषSatya Yuga (traditional)
- 2इक्ष्वाकुअयोध्या के प्रथम राजा; वंश उन्हीं के नाम सेSatya Yuga (traditional)
- 3कुक्षिSatya Yuga (traditional)
- 4अनरण्यउत्तरकाण्ड के अनुसार रावण से लड़ेtraditional
- 5मान्धातायुवनाश्व के पुत्र; चक्रवर्तीtraditional
- 6त्रिशंकुविश्वामित्र ने उन्हें सशरीर स्वर्ग भेजना चाहाtraditional
- 7हरिश्चन्द्रत्रिशंकु के पुत्र; सत्य के लिए सब त्यागाtraditional
- 8सगरउनका अश्वमेध-अश्व पुत्रों को कपिल मुनि तक ले गयाtraditional
- 9अंशुमानसगर के पौत्र; अश्व वापस लाएtraditional
- 10भगीरथगंगा को धरती पर उताराtraditional
- 11अम्बरीषभक्त, जिनकी रक्षा सुदर्शन ने दुर्वासा से कीtraditional
- 12दिलीप (रघु के पिता)नन्दिनी गौ की सेवा; रघुवंश सर्ग 2Treta Yuga (traditional)
- 13रघुदिग्विजय; कुल उन्हीं से रघुकुल कहलायाTreta Yuga (traditional)
- 14अजइन्दुमती के पतिTreta Yuga (traditional)
- 15दशरथपुत्रकामेष्टि यज्ञ कियाTreta Yuga (traditional)
- 16श्रीरामभगवान विष्णु के सातवें अवतारTreta Yuga (traditional)
- 17कुशकुशावती, फिर अयोध्या से राज कियाTreta Yuga (traditional)
- 18अतिथिरघुवंश के अनुसार कुश के पुत्रtraditional
- 19बृहद्बलकुरुक्षेत्र में अभिमन्यु द्वारा मारे गएDvapara Yuga (traditional)
- 20कोसल-नरेश प्रसेनजितपुराण इन्हें ऐक्ष्वाक मानते हैंc. 6th–5th century BCE
- 21सुमित्रविष्णु पुराण में वंश के अन्तिम राजाKali Yuga (Puranic list)
उनकी विरासत
- आदिकाव्य वाल्मीकि रामायण और रामराज्य का आदर्श
- सात मोक्षदायिनी पुरियों में अयोध्या
- भगीरथ और गंगावतरण की कथा, जो हर घाट पर सुनाई जाती है
- कालिदास का रघुवंश और तुलसीदास का रामचरितमानस
- भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के अनेक राजकुलों का सूर्यवंशी होने का दावा









