चित्र: anonymous · Public domain
ऋषि

महर्षि वाल्मीकि

आदिकवि, रामायण के रचयिता

त्रेता युग (पारंपरिक गणना)

वाल्मीकि आदिकवि हैं, जिनकी लगभग 24,000 श्लोकों की रामायण श्रीराम का जीवन कहती है। वे श्रीराम के समकालीन थे, और उनके आश्रम में माता सीता रहीं, जहाँ लव और कुश का जन्म हुआ।

“मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः। यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥”Valmiki Ramayana, Bala Kanda 2.15

01पहला श्लोक

देवर्षि नारद तमसा तट पर वाल्मीकि के आश्रम आए और संक्षेप में श्रीराम का चरित सुनाया। कुछ ही समय बाद नदी की ओर जाते हुए वाल्मीकि ने देखा कि एक व्याध ने क्रौंच पक्षियों के जोड़े में से एक को मार गिराया। उनके मन में उठा शोक शाप बनकर निकला, और वह शाप छन्द में बँधा था। वे अपने ही वचनों पर चकित रह गए। तब ब्रह्माजी प्रकट हुए और कहा कि इसी अनुष्टुप छन्द में वे रामकथा कहें। बालकाण्ड के आरम्भ में यह कथा है।

02सीता का आश्रय

उत्तरकाण्ड में जब सीता अयोध्या छोड़ती हैं, तब वाल्मीकि का आश्रम ही उन्हें शरण देता है। लव और कुश वहीं पले और स्वयं कवि से रामायण सीखी, फिर अश्वमेध के समय श्रीराम की सभा में उसका गान किया। स्कन्द पुराण और लोक परंपरा में कथा है कि ऋषि बनने से पहले वे रत्नाकर नाम के वनवासी डाकू थे, जिन्होंने राम नाम उल्टा, ‘मरा मरा’, जपना आरम्भ किया और इतने लीन हुए कि उन पर दीमक की बाँबी (वल्मीक) बन गई। वाल्मीकि जयंती आश्विन पूर्णिमा को मनाई जाती है।

सूर्यवंश (इक्ष्वाकु वंश)
राजवंश · सतयुग और त्रेतायुग से कलियुग तक (पारम्परिक गणना)सूर्यवंश (इक्ष्वाकु वंश)सूर्यवंश वैवस्वत मनु से उनके पुत्र इक्ष्वाकु के द्वारा चला और अयोध्या से राज करता रहा। मान्धाता, हरिश्चन्द्र, सगर, भगीरथ, रघु और श्रीराम इसी कुल के राजा हैं, और पुराण इस वंश को कलियुग में सुमित्र तक ले जाते हैं।पढ़ें →

“मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः। यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥”

Valmiki Ramayana, Bala Kanda 2.15