01रामबोला
सर्वाधिक मान्य परम्परा उनका जन्म यमुना तट के राजापुर में मानती है। अशुभ नक्षत्र में जन्मे बालक को त्याग दिया गया, और कथा है कि उसका पहला शब्द ‘राम’ था, इसलिए नाम पड़ा रामबोला। साधु नरहरिदास ने उसे अपनाया और रामकथा सुनाई। रत्नावली से विवाह के बाद वे एक रात उनके पीछे-पीछे ससुराल जा पहुँचे; रत्नावली ने कहा, हाड़-मांस की इस देह से जितना प्रेम है उसका आधा भी राम से होता तो भवबंधन छूट जाता। उसी दिन उन्होंने घर छोड़ दिया।
02मानस और काशी
आरम्भ की तिथि उन्होंने स्वयं मानस में दी है; परम्परा कहती है कि यह दो वर्ष, सात महीने और छब्बीस दिन में पूरा हुआ, चौपाई-दोहों के सात काण्डों में। काशी के पंडितों ने पहले लोकभाषा की रामायण का तिरस्कार किया; पर मानस उत्तर भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली पुस्तक बन गई। उन्होंने विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली और दोहावली भी रचीं, और हनुमान चालीसा उन्हीं के नाम से गाई जाती है। काशी की परम्परा संकटमोचन मंदिर और नगर की रामलीला का आरम्भ उन्हीं को मानती है। संवत 1680, 1623 ई., में अस्सी घाट पर उनका देहांत हुआ।

“सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥”
Ramcharitmanas, Bal Kanda

