आज भी खड़ा

स्कर्दू और खरपोचो दुर्ग

सिंधु तट पर बल्तिस्तान का मुख्य नगर, जिसे 1840 में ज़ोरावर सिंह ने जम्मू के डोगरा राज्य के लिए जीता। 1948 में इसकी सेना छह महीने तक आक्रांताओं से लड़ती रही, फिर दुर्ग गिरा।

निर्माण: खरपोचो दुर्ग, 16वीं शताब्दी का उत्तरार्ध, बल्तिस्तान के मक़पोन शासकों के समयस्थान: बल्तिस्तान (गिलगित-बल्तिस्तान), Pakistan-occupied Kashmir35.30° N, 75.63° E
  1. 1840 ई.
  2. फ़रवरी–अगस्त 1948
  3. 14 अगस्त 1948
चित्र: Hannan Balti · CC BY-SA 4.0

01बल्तिस्तान में ज़ोरावर सिंह

खरपोचो, यानी दुर्गों का राजा, सिंधु के ऊपर उस चट्टानी कटक पर है जहाँ शिगर नदी आकर मिलती है। 1834 से जम्मू के राजा गुलाब सिंह के सेनापति ज़ोरावर सिंह लद्दाख को डोगरा राज्य में ले आए थे। 1839–40 की सर्दियों में वे बल्तिस्तान में घुसे, बल्ती सेना को हराया और 1840 में स्कर्दू ले लिया, वहाँ के शासक अहमद शाह को हटाकर जम्मू के प्रति निष्ठावान शासक बैठाया। यहाँ से वे पूर्व की ओर मुड़े और 1841 में मानसरोवर और पश्चिमी तिब्बत तक गए, जहाँ उसी दिसम्बर तोयो में वीरगति पाई। बल्तिस्तान जम्मू-कश्मीर के साथ रहा।

021948 का घेरा

अक्टूबर 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के बाद गिलगित स्काउट्स ने विद्रोह किया और हमलावर बल्तिस्तान में घुसे। स्कर्दू में जम्मू-कश्मीर राज्य सेना के लेफ़्टिनेंट कर्नल शेर जंग थापा ने फ़रवरी 1948 से एक छोटी टुकड़ी के साथ दुर्ग और नगर को थामे रखा। सहायता के लिए भेजी टुकड़ियाँ पहुँच नहीं सकीं, और आकाश से गिराई रसद बहुत कम थी। लगभग छह महीने बाद, भोजन और गोला-बारूद ख़त्म होने पर, 14 अगस्त 1948 को सेना ने हथियार डाले। थापा को बाद में महावीर चक्र मिला। तब से स्कर्दू पाकिस्तान के कब्ज़े में है; भारत इसे लद्दाख का भाग मानता है।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 1840 ई.ज़ोरावर सिंह ने डोगरा राज्य के लिए स्कर्दू जीता।
  2. फ़रवरी–अगस्त 1948शेर जंग थापा की सेना ने लगभग छह महीने तक घिरे स्कर्दू को थामे रखा।
  3. 14 अगस्त 1948सेना ने हथियार डाले; स्कर्दू पाकिस्तान के कब्ज़े में चला गया।