01लव का नगर
पंजाबी परम्परा मानती है कि लाहौर श्रीराम और माता सीता के पुत्र लव ने बसाया और पास का कसूर उनके भाई कुश ने; लाहौर क़िले के भीतर लव का एक छोटा देवस्थान था। लिखित इतिहास में यह नगर हिन्दू शाही राजाओं जयपाल और आनन्दपाल के राज्य में था, जिन्होंने सिन्धु से सतलुज तक महमूद ग़ज़नवी से युद्ध किया। आनन्दपाल के पुत्र त्रिलोचनपाल के पतन के बाद महमूद ने लगभग 1020–21 में लाहौर को राज्य में मिलाया और यह ग़ज़नवियों का पूर्वी केन्द्र बना। ग़ोरियों ने 1186 में इसे लिया, मंगोलों ने 1241 में लूटा, और अकबर ने क़िला फिर बनवाकर 1584 से 1598 तक यहीं दरबार लगाया।
02गुरु अर्जन और सिख दरबार
पाँचवें सिख गुरु, गुरु अर्जन देव को जहाँगीर की आज्ञा से 1606 में लाहौर में यातना देकर शहीद किया गया; क़िले के पास गुरुद्वारा डेरा साहिब वह स्थान चिह्नित करता है। 7 जुलाई 1799 को रणजीत सिंह के नगर में प्रवेश के साथ लाहौर सिख नगर के रूप में फिर जन्मा। 1801 की बैसाखी पर वे पंजाब के महाराजा घोषित हुए, और यहीं से ख़ैबर से सतलुज तक और कश्मीर से मुल्तान तक राज किया। उनकी समाधि बादशाही मस्जिद के पास है। 1839 में उनके देहान्त के बाद दरबार गुटों में बँट गया, और 29 मार्च 1849 को अंग्रेज़ों ने पंजाब को मिला लिया तथा बालक राजा दलीप सिंह से कोहिनूर ले लिया।
03बलिदानी और विभाजन
30 अक्टूबर 1928 को साइमन कमीशन के विरोध का नेतृत्व करते लाला लाजपत राय पर लाहौर में पुलिस ने लाठियाँ बरसाईं, और उसी नवम्बर उनका देहान्त हुआ। 31 दिसम्बर 1929 को रावी-तट पर कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज को लक्ष्य घोषित किया। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर सेंट्रल जेल में फाँसी दी गई। 1947 में लाहौर, जहाँ बड़े हिन्दू और सिख समुदाय थे और पंजाब के अनेक कॉलेज थे, पाकिस्तान में गया। इसके मन्दिर, जिनमें कृष्ण मन्दिर और वाल्मीकि मन्दिर हैं, आज भी खड़े हैं, और हिन्दुओं का एक छोटा समुदाय ही बचा है।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- लगभग 1020–21हिन्दू शाहियों के पतन के बाद महमूद ग़ज़नवी लाहौर को राज्य में मिलाता है।
- 1186मुहम्मद ग़ोरी अन्तिम ग़ज़नवी से लाहौर लेता है।
- 1241मंगोल लाहौर लूटते हैं।
- 1606जहाँगीर की आज्ञा से लाहौर में गुरु अर्जन देव शहीद होते हैं।
- 7 जुलाई 1799रणजीत सिंह लाहौर लेते हैं।
- बैसाखी 1801रणजीत सिंह लाहौर में पंजाब के महाराजा घोषित होते हैं।
- 29 मार्च 1849अंग्रेज़ पंजाब को मिला लेते हैं और सिख साम्राज्य समाप्त होता है।
- 23 मार्च 1931भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर जेल में फाँसी दी जाती है।
- अगस्त 1947लाहौर पाकिस्तान में जाता है; इसके हिन्दू और सिख पूर्व की ओर पलायन करते हैं।
भारतीय तीर्थयात्री मुख्यतः गुरु अर्जन देव के शहीदी दिवस और रणजीत सिंह की बरसी पर सिख जत्थों के साथ लाहौर पहुँचते हैं और डेरा साहिब तथा समाधि के दर्शन करते हैं।










