01उज्जैनिया गद्दी
मालवा के परमारों से अपनी वंश-परम्परा मानने वाले उज्जैनिया सदियों तक गंगा के दक्षिण के भोजपुर प्रदेश पर अधिकार रखते रहे। गजपति साही ने 1539 से पहले जगदीशपुर की किलेबन्दी की, और मुग़ल स्रोत बताते हैं कि 1575 में अकबर की सेना ने इसे लूटा। 1702 में सुजान साही ने इसे एक जागीर की गद्दी बनाया, और उनके उत्तराधिकारियों ने उसे बढ़ाया। 1777 में जन्मे कुँवर सिंह को एक बड़ी पर क़र्ज़ में डूबी ज़मींदारी मिली। उन्होंने दुर्ग की मरम्मत करवाई, कुएँ और तालाब खुदवाए, बाज़ार बसाए और एक बड़ा शिव मन्दिर आरम्भ किया; महाशिवरात्रि पर जगदीशपुर में मेला लगता था जिसमें दूर-दूर के व्यापारियों का आना अपेक्षित था। 1850 के दशक तक कम्पनी की राजस्व अदालतें उन पर भारी दबाव डाल रही थीं।
02कुँवर सिंह का युद्ध
25 जुलाई 1857 को जब दानापुर के सिपाही उठे, तो वे जगदीशपुर आए और वृद्ध राजा ने कमान सँभाली। उन्होंने 27 जुलाई से 3 अगस्त तक आरा के एक क़िलेबन्द मकान में कम्पनी के अधिकारियों को घेरे रखा, जब तक मेजर विन्सेंट आयर ने उन्हें नहीं छुड़ाया। फिर आयर ने जगदीशपुर पर चढ़ाई की, 12 अगस्त को उसे लिया और राजा का महल और भवन बारूद से उड़वा दिए। कुँवर सिंह अपने सैनिकों के साथ भोजपुर से निकले और रीवा, बाँदा और काल्पी होते हुए पश्चिम तक लड़ते गए, फिर पूर्व लौटे और मार्च 1858 में आज़मगढ़ ले लिया। शिवपुर घाट पर गंगा पार करते समय अंग्रेज़ी गोली से उनका हाथ घायल हुआ, और कहा जाता है कि उन्होंने स्वयं उसे काटकर गंगा को अर्पित कर दिया। 23 अप्रैल 1858 को उन्होंने जगदीशपुर में कैप्टन ले ग्रैण्ड की टुकड़ी को हराकर अपने घर में फिर प्रवेश किया। 26 अप्रैल को उनका देहान्त हुआ। बिहार 23 अप्रैल को विजयोत्सव के रूप में मनाता है।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 1575मुग़ल सेना जगदीशपुर लूटती है।
- 1702सुजान साही जगदीशपुर को जागीर की गद्दी बनाते हैं।
- 12 अगस्त 1857मेजर आयर जगदीशपुर लेता है और राजा के भवन उड़ा देता है।
- 23 अप्रैल 1858कुँवर सिंह ले ग्रैण्ड की टुकड़ी को हराकर जगदीशपुर में फिर प्रवेश करते हैं।
- 26 अप्रैल 1858जगदीशपुर में कुँवर सिंह का देहान्त।
आरा से लगभग 30 किमी; नगर में वीर कुँवर सिंह का दुर्ग और संग्रहालय है।





