01आरा और लंबा अभियान
25 जुलाई 1857 को दानापुर के सिपाही उठे और जगदीशपुर पहुँचे; कंपनी की राजस्व अदालतों से पहले ही कर्ज़ और विवाद में उलझे वृद्ध राजा ने उनकी कमान सँभाली। उन्होंने आरा के उस किलेबंद मकान को घेरा जिसमें अंग्रेज़ों का छोटा दल डटा रहा, जब तक 3 अगस्त को विन्सेंट आयर ने उसे नहीं छुड़ाया। जगदीशपुर हाथ से गया, पर कुँवर सिंह रुके नहीं। रीवा और बांदा होते हुए वे कालपी और लखनऊ की ओर बढ़े और मार्च 1858 में आज़मगढ़ पर अधिकार कर लिया। यह सब उन्होंने अस्सी पार की आयु में किया।
02गंगा को अर्पित भुजा
अप्रैल 1858 में वे घर लौटे। शिवपुर घाट पर गंगा पार करते समय अंग्रेज़ी गोली उनकी बाँह में लगी। बिहार की स्मृति कहती है कि उन्होंने अपनी तलवार से घायल बाँह काटकर गंगा को अर्पित कर दी। 23 अप्रैल 1858 को जगदीशपुर के बाहर कैप्टन ली ग्रैंड की टुकड़ी से भिड़कर उन्होंने उसे खदेड़ दिया। घाव के कारण 26 अप्रैल को उनका देहांत हुआ। उनके भाई अमर सिंह महीनों तक लड़ाई जारी रखे रहे। बिहार 23 अप्रैल को विजयोत्सव के रूप में मनाता है, और आरा का वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय उनके नाम पर है।



