आज भी खड़ा

बावे वाली माता (महाकाली), बाहु क़िला, जम्मू

तवी के ऊपर चट्टान पर खड़े बाहु क़िले के भीतर का काली मन्दिर जम्मू की रक्षक देवी का स्थान है। जम्मू के लोग उन्हें बावे वाली माता कहते हैं, और वैष्णो देवी के बाद यहाँ इस क्षेत्र की सबसे बड़ी भीड़ जुटती है।

निर्माण: क़िले की नींव परम्परा से राजा बाहुलोचन की; मन्दिर और क़िले का पुनर्निर्माण डोगरा शासकों ने, 18वीं–19वीं शताब्दीस्थान: जम्मू और कश्मीर (जम्मू)देवता: माँ महाकाली32.73° N, 74.88° E
  1. 18वीं शताब्दी
चित्र: Vedant Sharma · CC BY-SA 4.0

01बाहुलोचन का क़िला

जम्मू की अपनी परम्परा कहती है कि नगर राजा जम्बूलोचन ने बसाया, जिन्होंने तवी पर शेर और बकरी को साथ-साथ पानी पीते देखा था, और उनके भाई बाहुलोचन ने सामने के तट पर क़िला बनवाया। आज खड़ी दीवारें डोगरा काल की हैं, जब क़िले का पुनर्निर्माण और विस्तार हुआ। भीतर महाकाली का मन्दिर है। मूर्ति काले पत्थर की है, और देवी डोगरा भूमि की रक्षक के रूप में पूजी जाती हैं; पुरानी जम्मू सेना के सैनिक अभियान से पहले उनका आशीर्वाद लेते थे।

02मंगलवार और रविवार

मंगलवार और रविवार को क़िले तक जाने वाली गली सुबह से भर जाती है। श्रद्धालु लाल चुनरी, नारियल और मिठाई लाते हैं; नवरात्र में पंक्ति पहाड़ी के नीचे तक जाती है। क़िले की दीवारों के नीचे बाग़-ए-बाहु उद्यान है, जो हाल के दशकों में बना, और बहुत से परिवार पूरा दिन यहीं बिताते हैं, पहले दर्शन, फिर उद्यान।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 18वीं शताब्दीजम्मू के डोगरा शासकों के अधीन क़िले का पुनर्निर्माण होता है।
दर्शन और यात्रा

शहर के केन्द्र से लगभग 5 किमी, तवी के बाएँ तट पर; मंगलवार, रविवार और दोनों नवरात्रों में सबसे अधिक भीड़ रहती है।