01भस्मासुर का पीछा
गुफा के मुहाने पर भस्मासुर की कथा सुनाई जाती है। उसके तप से प्रसन्न होकर महादेव ने वर दिया कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा; फिर असुर स्वयं महादेव के पीछे पड़ गया। स्थानीय कथा कहती है कि शिव इन पहाड़ियों में आए, त्रिशूल से यह गुफा खोली और इसमें छिपे रहे, जब तक भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप में भस्मासुर से उसका अपना हाथ अपने सिर पर न रखवा दिया। रास्ते में श्रद्धालु चट्टान में बनी आकृतियाँ दिखाते हैं, शेषनाग का फन, पार्वती, गणेश और नन्दी, और वे सफ़ेद धारियाँ जहाँ युगों से जल बहता आया है।
02गुफा के भीतर
आधार शिविर रनसू से लगभग 3 किमी का पक्का रास्ता गुफा तक चढ़ता है। मार्ग कहीं-कहीं बहुत सँकरा है; यात्री झुककर और सिमटकर निकलते हैं, फिर लिंग वाला कक्ष खुलता है। महाशिवरात्रि पर बड़ा मेला लगता है, तीन दिन तक भीड़ और भजन। 9 जून 2024 को शिवखोड़ी से कटरा लौट रहे यात्रियों की बस पर आतंकवादियों ने गोलियाँ चलाईं; नौ लोग मारे गए। यात्रा चलती रही।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 9 जून 2024रियासी के पास शिवखोड़ी के यात्रियों की बस पर आतंकी आक्रमण; नौ लोग मारे जाते हैं।
कटरा से रनसू सड़क मार्ग से लगभग 80 किमी है; रनसू से गुफा तक लगभग 3 किमी पैदल। घोड़े और पालकी मिलते हैं, और गुफा के भीतर पंक्ति श्राइन बोर्ड सँभालता है।




