01त्रिकूट की कथा
यात्रियों के भजनों की कथा: देवी ने भगवान विष्णु की तपस्या के लिए वैष्णवी नामक कन्या के रूप में जन्म लिया। भैरों नाथ ने पर्वत पर उनका पीछा किया। वे नौ महीने एक सँकरी गुफा, अर्धकुँवारी, में रहीं, जैसे शिशु गर्भ में रहता है, फिर शिखर की गुफा में गईं, जहाँ उन्होंने तीन पिण्डियों का रूप लिया और भैरों का सिर काटा। मृत्यु के समय क्षमा पाकर भैरों ने माँगा कि उनके दर्शन से ही यात्रा पूरी हो, इसीलिए यात्री बाद में भैरों मन्दिर तक चढ़ते हैं। देवी के भक्त पण्डित श्रीधर गुफा को फिर खोजने वाले के रूप में स्मरण किए जाते हैं।
02आज की यात्रा
कटरा से मार्ग बाणगंगा, चरण पादुका और अर्धकुँवारी होते हुए लगभग 12 किमी चढ़कर लगभग 1,580 मीटर पर भवन तक पहुँचता है। चढ़ाई पर दिन-रात हर घड़ी "जय माता दी" गूँजता है। 1986 से मन्दिर का प्रबन्ध श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड करता है, जिसने गुफा तक नई सुरंगें, बैटरी-कार मार्ग और साँझीछत का हेलिपैड बनाया। हाल के वर्षों में एक वर्ष में लगभग एक करोड़ यात्री आए हैं।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 1986 ई.श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड मन्दिर का प्रबन्ध सँभालता है।
कटरा में यात्रा पर्ची बनवाएँ (रेलवे स्टेशन श्री माता वैष्णो देवी कटरा); चैत्र और आश्विन नवरात्र सबसे भीड़ वाले दिन हैं।




