आज भी खड़ा

ज़ीरादेई

सीवान ज़िले का वह गाँव जहाँ 3 दिसम्बर 1884 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म हुआ। उनका पारिवारिक घर आज भी खड़ा है और स्मारक के रूप में रखा गया है।

निर्माण: सारण प्रदेश का गाँव; राजेन्द्र प्रसाद का पैतृक घरस्थान: बिहार (सीवान ज़िला)26.22° N, 84.20° E
  1. 3 दिसम्बर 1884
  2. 26 जनवरी 1950
चित्र: Yann (talk) · Public domain

01सारण में बचपन

राजेन्द्र प्रसाद का जन्म यहाँ एक कायस्थ परिवार में हुआ; उनके पिता महादेव सहाय फ़ारसी और संस्कृत जानते थे, और माता ने उन्हें रामायण सुनाई। प्रथा के अनुसार उन्होंने गाँव में एक मौलवी से फ़ारसी आरम्भ की, फिर छपरा और कलकत्ता गए, जहाँ विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में प्रथम आए। वे पटना में वकील बने, और 1917 में बड़ी वकालत छोड़कर चम्पारण के नील किसानों के बीच गांधी के साथ काम करने लगे। दिसम्बर 1946 से उन्होंने संविधान सभा की अध्यक्षता की और 1950 से 1962 तक भारत के राष्ट्रपति रहे।

02ज़ीरादेई का घर

पारिवारिक घर, आँगन के चारों ओर ईंटों का बड़ा ग्रामीण घर, आज भी ज़ीरादेई में खड़ा है और उनके जीवन की वस्तुओं के साथ स्मारक के रूप में रखा गया है। राजेन्द्र बाबू जीवन भर यहाँ लौटते रहे, और 1940 के दशक में जेल में लिखी उनकी ‘आत्मकथा’ गाँव, उसके लोगों और उसकी रीतियों से आरम्भ होती है। हर वर्ष उनकी जयंती पर ज़िले के लोग यहाँ जुटते हैं। 28 फ़रवरी 1963 को पटना में उनका देहांत हुआ।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 3 दिसम्बर 1884ज़ीरादेई में राजेन्द्र प्रसाद का जन्म हुआ।
  2. 26 जनवरी 1950ज़ीरादेई का बेटा भारत का पहला राष्ट्रपति बना।