01रामनाथपुरम की भेंट
वे एक तेलुगु-भाषी कंबलत्तार परिवार से थे जो पीढ़ियों से तूत्तुकुडि के पास पांचालंकुरिच्चि का स्वामी था, और 1790 में उसके सरदार बने। अर्काट के नवाब की जगह अब पालैयक्कारों से कर वसूलने का अधिकार कंपनी ने ले लिया था, और कट्टबोम्मन का कर बकाया हो गया। सितंबर 1798 में कलेक्टर विलियम जैक्सन ने उन्हें रामनाथपुरम बुलाया। भेंट क्रोध में टूटी। लौटते समय किले के फाटक पर झड़प हुई और कंपनी का लेफ़्टिनेंट क्लार्क मारा गया। बाद की जाँच ने जैक्सन को दोषी पाया और उसे हटा दिया गया।
02पांचालंकुरिच्चि और कयत्तार
कट्टबोम्मन फिर भी नहीं झुके, और पड़ोसी सरदारों को अपने साथ जोड़ा। सितंबर 1799 में मेजर बैनरमैन सेना और तोपें लेकर पांचालंकुरिच्चि पहुँचा। पहला धावा लौटा दिया गया; फिर रक्षक रात में किले से निकल गए। कट्टबोम्मन पुदुक्कोट्टै प्रदेश में पकड़े गए और सौंप दिए गए। बैनरमैन ने ज़िले के सरदारों को कयत्तार बुलाया, छोटा-सा मुक़दमा चलाया और 16 अक्टूबर 1799 को उन्हें फाँसी दी। किला ढहाकर ज़मीन जोत दी गई। उनके भाई ऊमैत्तुरै 1801 में कारागार तोड़कर निकले और युद्ध जारी रखा।








