पांचालंकुरिची का घेरा

पक्षपांचालंकुरिची का पालैयमवीरपांड्य कट्टबोम्मन
1799 ई.बनाम
विजेताईस्ट इंडिया कंपनीमेजर जॉन बैनरमैन

कट्टबोम्मन के मिट्टी के किले ने कंपनी के पहले धावा दल को लौटा दिया, और यह घेरा पालैयक्कार युद्धों का पहला अंक बना।

तिथि: सितंबर 1799 ई.स्थान: पांचालंकुरिची, तूतुकुडी ज़िला, तमिलनाडुप्रकार: घेराबंदी
चित्र: Redmanored · CC BY-SA 4.0
परिणाम

पहला धावा हानि के साथ लौटा दिया गया, पर कट्टबोम्मन रात में किला छोड़ गए; कुछ हफ़्ते बाद वे पकड़े गए और कयत्तार में फाँसी दी गई।

01कर न देने वाला किला

पांचालंकुरिची तूतुकुडी के उत्तर के काली मिट्टी वाले प्रदेश के पालैयक्कार कट्टबोम्मन परिवार की गद्दी थी। वीरपांड्य कट्टबोम्मन का 1798 में रामनाथपुरम में कंपनी के कलेक्टर जैक्सन से विवाद हुआ था और उन्होंने बकाया कर देने से इनकार किया। सितंबर 1799 में मेजर बैनरमैन पालयंकोट्टै से सैनिक और तोपें लाया और उन्हें आत्मसमर्पण का आदेश भेजा। कट्टबोम्मन ने मना किया। किला मिट्टी का था, मोटी दीवारें और कँटीली बाड़ के साथ, और कंपनी का पहला धावा दल अफ़सरों और सैनिकों को खोकर दीवारों से लौटा दिया गया।

02निकलना, पकड़ा जाना, इमली का पेड़

भारी तोपें आती देख कट्टबोम्मन और उनके साथी रात में चुपके से किले से निकलकर उत्तर चले गए। कंपनी ने पांचालंकुरिची पर अधिकार कर लिया। पुदुक्कोट्टई के राजा के आदमियों ने कट्टबोम्मन को जंगलों में पकड़ा, और 16 अक्टूबर 1799 को बैनरमैन ने एकत्र पालैयक्कारों के सामने कयत्तार में उन्हें इमली के पेड़ से फाँसी दी। उनके भाई ऊमैदुरै ने बाद में कारागार तोड़कर किला फिर खड़ा किया, जिसे कंपनी ने 1801 में सदा के लिए गिरा दिया।

वीरपांडिय कट्टबोम्मन
व्यक्तित्व · 1760–1799 ई.वीरपांडिय कट्टबोम्मन1790 से पांचालंकुरिच्चि के सरदार कट्टबोम्मन ने कंपनी का माँगा कर चुकाने से इनकार किया। सितंबर 1799 में उनके किले पर धावा हुआ, और 16 अक्टूबर 1799 को कयत्तार में दक्षिण के इकट्ठे सरदारों के सामने उन्हें इमली के पेड़ पर फाँसी दी गई।पढ़ें →
महत्त्व

इस घेरे ने कट्टबोम्मन को कंपनी के विरुद्ध तमिल प्रतिरोध का पहला नायक बनाया, जिनकी स्मृति लोकगीतों और पांचालंकुरिची के पुनर्निर्मित किले-स्मारक में जीवित है।