यह क्या कहता है
लोहे को लकड़ी और पत्तियों के साथ मिट्टी की घड़ियों में बन्द करके घंटों तपाया और धीरे-धीरे ठंडा किया जाता था, जिससे कार्बन से भरपूर इस्पात की छोटी टिकियाँ बनती थीं। सावधानी से गढ़ने पर तलवार पर लहरदार आकृति उभरती थी। अंग्रेज़ी नाम कन्नड़ के ‘उक्कु’ से आया है। जॉर्ज पियर्सन ने 1795 में रॉयल सोसाइटी को इसके नमूनों पर रिपोर्ट दी, और माइकल फ़ैराडे ने इसकी नक़ल करने का प्रयास किया। 2006 में इस इस्पात की 17वीं शताब्दी की एक तलवार में कार्बन नैनोट्यूब पाए गए।
यह दिखाता है कि दक्षिण भारतीय लोहार प्राचीन और मध्यकालीन संसार का सबसे उत्तम इस्पात बनाते थे, जिसकी माँग फ़ारस से यूरोप तक थी।







