चित्र: Jyesthadeva (author) J. L. Whish (collector) · Public domain
विज्ञान · लगभग 1350–1650 ई.

केरल का गणित और ज्योतिष सम्प्रदाय

प्राप्ति
केरल में निला (भारतप्पुझा) नदी के गाँव, संगमग्राम से तिरूर तक; मलयालम और संस्कृत में ताड़पत्र पाण्डुलिपियाँ
अब कहाँ
केरल के संग्रहों में ताड़पत्र पाण्डुलिपियाँ; मुद्रित संस्करण

गुरु-शिष्यों की एक परम्परा, जो संगमग्राम के माधव से आरम्भ हुई, जिसने पाई और ज्या-कोज्या की अनन्त श्रेणियाँ यूरोप से लगभग तीन शताब्दी पहले खोज लीं।

यह क्या कहता है

माधव (लगभग 1340–1425) ने वह श्रेणी दी जिसमें पाई का चौथाई एक में से एक-तिहाई घटाकर, पाँचवाँ जोड़कर, सातवाँ घटाकर, अनन्त तक चलता है, साथ में इसके शेष को सुधारने के उपाय, और ज्या तथा कोज्या की श्रेणियाँ। नीलकण्ठ सोमयाजी ने इन्हें तन्त्रसंग्रह (1500) में रखा, और ज्येष्ठदेव ने मलयालम में युक्तिभाषा (लगभग 1530) लिखी, जिसमें इनकी उपपत्तियाँ हैं। चार्ल्स विश ने 1834 के एक शोधपत्र में इन्हें यूरोप के सामने रखा।

यह क्या सिद्ध करता है

यह दिखाता है कि कलन जैसी विधियाँ केरल में, एक अटूट गुरु-शिष्य परम्परा में, न्यूटन और लाइबनिज़ से बहुत पहले विकसित हुईं।

इनका प्रमाण