यह क्या कहता है
इसमें 1001 में पेशावर के पास शाही राजा जयपाल की पराजय और बन्दी बनाए जाने, और थानेसर, मथुरा तथा कन्नौज पर आक्रमणों का लेखा है। मथुरा के बारे में महमूद के मुँह से कहलाया गया है कि उसके मन्दिर जैसा भवन दस करोड़ दीनार में या दो सौ वर्ष से कम में नहीं बन सकता।
यह ग़ज़नवी आक्रमणों और हिन्दू शाही प्रतिरोध का समकालीन लेखा है, स्वयं आक्रमणकारी के दरबार से।











