चित्र: Unknown scribe & Illuminator. · Public domain
इतिवृत्त · लगभग 1020 ई.

अल-उत्बी की तारीख़-ए-यमीनी

प्राप्ति
महमूद के दरबार के सचिव अबू नस्र अल-उत्बी ने ग़ज़नी में अरबी में लिखी
अब कहाँ
अरबी पाण्डुलिपियाँ और तेरहवीं शताब्दी का फ़ारसी अनुवाद अनेक पुस्तकालयों में

सुबुक्तगीन और उसके पुत्र महमूद ग़ज़नवी का दरबारी इतिहास, जो तब लिखा गया जब महमूद भारत पर आक्रमण कर ही रहा था।

यह क्या कहता है

इसमें 1001 में पेशावर के पास शाही राजा जयपाल की पराजय और बन्दी बनाए जाने, और थानेसर, मथुरा तथा कन्नौज पर आक्रमणों का लेखा है। मथुरा के बारे में महमूद के मुँह से कहलाया गया है कि उसके मन्दिर जैसा भवन दस करोड़ दीनार में या दो सौ वर्ष से कम में नहीं बन सकता।

यह क्या सिद्ध करता है

यह ग़ज़नवी आक्रमणों और हिन्दू शाही प्रतिरोध का समकालीन लेखा है, स्वयं आक्रमणकारी के दरबार से।

इनका प्रमाण