चित्र: Unknown · Public domain
इतिवृत्त · 1311–12 ई.

अमीर ख़ुसरो की ख़ज़ाइन-उल-फ़ुतूह

प्राप्ति
अलाउद्दीन ख़िलजी के दरबारी कवि अमीर ख़ुसरो द्वारा दिल्ली में लिखी गई
अब कहाँ
फ़ारसी पाण्डुलिपियाँ; मुहम्मद हबीब का अंग्रेज़ी अनुवाद (1931)

‘विजयों के ख़ज़ाने’: 1311 तक के अलाउद्दीन ख़िलजी के अभियानों का फ़ारसी गद्य वृत्तान्त, उसके दरबार के एक प्रत्यक्षदर्शी का लिखा।

यह क्या कहता है

ख़ुसरो रणथम्भौर और चित्तौड़ के पतन का वर्णन करता है, फिर मलिक काफ़ूर के दक्षिण-अभियान का: 1310 में वारंगल का घेरा, जहाँ काकतीय प्रतापरुद्र ने ख़ज़ाना, हाथी और घोड़े देकर सन्धि ख़रीदी; 1311 में होयसलों का द्वारसमुद्र; और पाण्ड्य देश माबर पर धावा, जहाँ वह मन्दिर तोड़े जाने और उनका सोना ले जाने की बात लिखता है।

यह क्या सिद्ध करता है

यह काकतीय, होयसल और पाण्ड्य राज्यों पर उत्तर के पहले आक्रमण का स्वयं सुल्तान के दरबार का अभिलेख है।

इनका प्रमाण