चित्र: Anamdas · CC BY-SA 3.0
इतिवृत्त · 1259–1260 ई.

मिनहाज-ए-सिराज की तबक़ात-ए-नासिरी

प्राप्ति
सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद के मुख्य क़ाज़ी मिनहाज-ए-सिराज जूज़जानी ने दिल्ली में फ़ारसी में लिखी
अब कहाँ
फ़ारसी पाण्डुलिपियाँ; एच. जी. रेवर्टी का अंग्रेज़ी अनुवाद (1881)

दिल्ली सल्तनत पर समाप्त होने वाला सामान्य इतिहास, उत्तर भारत की ग़ोरी विजय का मुख्य स्रोत।

यह क्या कहता है

इसमें बताया गया है कि 1191 में तराइन में पृथ्वीराज ने मुहम्मद ग़ोरी को घायल किया और उसकी सेना को खदेड़ा, और अगले वर्ष वह लौटा और जीता। इसमें बख़्तियार ख़िलजी के बिहार के एक परकोटे वाले स्थान पर आक्रमण का वर्णन है, जिसके निवासी अधिकतर मुंडित सिर वाले ब्राह्मण थे, और सब मारे गए; वहाँ बहुत सी पुस्तकें मिलीं, और पता चला कि पूरा स्थान एक विद्यालय था, जिसे हिन्दू विहार कहते हैं। लक्ष्मणसेन के नदिया से भागने का भी वर्णन है।

यह क्या सिद्ध करता है

यह तराइन के दोनों युद्धों और बिहार के महान विहार-विश्वविद्यालयों के विनाश का लगभग समकालीन लेखा है।

इनका प्रमाण