यह क्या कहता है
वह अप्रैल 1526 में पानीपत में इब्राहीम लोदी की पराजय, और मार्च 1527 में खानवा में राणा साँगा के विरुद्ध कठिन युद्ध का वर्णन करता है, जिससे पहले उसने शराब छोड़ी और युद्ध को जिहाद घोषित किया। 1528 में ग्वालियर में वह उरवा घाटी की शैलकृत जैन प्रतिमाओं को तुड़वाने का आदेश देना दर्ज करता है।
यह मुग़ल शासन के आरम्भ और राणा साँगा के नेतृत्व में राजपूत संघ के प्रतिरोध का विजेता का प्रत्यक्ष वृत्तान्त है।










