வங்கக் கடல்கடைந்த மாதவனைக் கேசவனைத்
திங்கள் திருமுகத்துச் சேயிழையார் சென்றிறைஞ்சி
அங்கப் பறைகொண்ட ஆற்றை அணிபுதுவைப்
பைங்கமலத் தண்தெரியல் பட்டர்பிரான் கோதைசொன்ன
சங்கத் தமிழ்மாலை முப்பதும் தப்பாமே
இங்கிப் பரிசுரைப்பார் ஈரிரண்டு மால்வரைத்தோள்
செங்கண் திருமுகத்துச் செல்வத் திருமாலால்
எங்கும் திருவருள்பெற்று இன்புறுவர் எம்பாவாய்
वङ्गक् कडल्गडैन्द मादवऩैक् केसवऩैत्
तिङ्गळ् तिरुमुगत्तुच् चेयिऴैयार् सॆऩ्ऱिऱैञ्जि
अङ्गप् पऱैगॊण्ड आऱ्ऱै अणिबुदुवैप्
पैङ्गमलत् तण्डॆरियल् पट्टर्बिराऩ् कोदैसॊऩ्ऩ
सङ्गत् तमिऴ्मालै मुप्पदुम् तप्पामे
इङ्गिप् परिसुरैप्पार् ईरिरण्डु माल्वरैत्तोळ्
सॆङ्गण् तिरुमुगत्तुच् चॆल्वत् तिरुमालाल्
ऎङ्गुम् तिरुवरुळ्बॆऱ्ऱु इऩ्बुऱुवर् ऎम्बावाय्
vaṅgak kaḍalgaḍainda mādavaṉaik kēsavaṉait
tiṅgaḷ tirumugattuc cēyiḻaiyār seṉṟiṟaiñji
aṅgap paṟaigoṇḍa āṟṟai aṇibuduvaip
paiṅgamalat taṇḍeriyal paṭṭarbirāṉ kōdaisoṉṉa
saṅgat tamiḻmālai muppadum tappāmē
iṅgip parisuraippār īriraṇḍu mālvaraittōḷ
seṅgaṇ tirumugattuc celvat tirumālāl
eṅgum tiruvaruḷbeṟṟu iṉbuṟuvar embāvāy
अर्थ
जहाँ जहाज़ चलते हैं उस सागर को मथने वाले माधव, केशव: चन्द्रमुखी, चमकते आभूषणों वाली बालिकाएँ उनके पास गईं, प्रणाम किया और ढोल पाया। सुंदर पुदुवै (श्रीविल्लिपुत्तूर) के, ताज़े कमलों की शीतल माला धारण करने वाले भट्टर्पिरान की पुत्री कोदै ने यह सब संगम-तमिऴ के तीस पदों की माला में कहा। जो इन तीसों को बिना चूके यहाँ पढ़ेगा, वह पर्वत-से चार विशाल कंधों वाले, लाल नयनों और सुंदर मुख वाले, ऐश्वर्यवान तिरुमाल से सब जगह कृपा पाएगा और आनन्द में रहेगा, हे हमारी पावै।
इस भजन के बारे में
अंतिम पद ग्वाल-गाँव से बाहर आकर गायिका का नाम बताता है। कोदै आण्डाळ का अपना नाम है; भट्टर्पिरान उनके पिता पेरियाऴ्वार हैं, श्रीविल्लिपुत्तूर के वटपत्रशायी मन्दिर के पुजारी, और उस नगर को वे पुदुवै कहती हैं। गोपियों के व्रत को वे समुद्र-मन्थन की कथा से जोड़ती हैं, जब लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने विष्णु का वरण किया, और अंत में तीस पद पढ़ने वाले को वचन देती हैं। मार्गऴि के अंतिम दिन पूरी तिरुप्पावै गाई जाती है, जो इसी पद पर पूरी होती है।
Nalayira Divya Prabandham, Tiruppavai 30 (prabandham no. 503), Project Madurai e-text pm0005_02; ta.wikisource Tiruppavai
