आण्डाळ (गोदा नाच्चियार)

आण्डाळ (गोदा नाच्चियार)

वैष्णव गुरु-परंपरा के अनुसार कलियुग का आरम्भ; इतिहासकारों के अनुसार लगभग 8वीं शताब्दी ई. · श्रीविल्लिपुत्तूर, तमिलनाडु · तमिल

आण्डाळ

आण्डाळ बारह आळ्वारों में अकेली स्त्री हैं। गुरु-परंपरा बताती है कि श्रीविल्लिपुत्तूर के मन्दिर के माली विष्णुचित्त, जिन्हें हम पेरियाळ्वार के नाम से जानते हैं, को अपनी फुलवारी में तुलसी के पौधों के नीचे एक नन्ही बालिका मिली, और उन्होंने उसे अपनी बेटी की तरह पाला। उसका नाम गोदा (कोदै) रखा।

गोदा पिता से कृष्ण की कथाएँ सुनती बड़ी हुईं और ठान लिया कि भगवान के सिवा किसी से विवाह नहीं करेंगी। पिता प्रतिदिन भगवान के लिए माला गूँथते, और प्रतिदिन मन्दिर ले जाने से पहले वे उसे पहनकर कुएँ के जल में अपना रूप देखतीं कि क्या वे प्रभु की वधू होने योग्य हैं। एक दिन पिता को माला में एक बाल मिला; उन्होंने बेटी को डाँटा और नई माला बनाई। उसी रात भगवान ने स्वप्न में कहा कि उन्हें वही माला चाहिए जो गोदा ने पहनी थी। इसीलिए वे चूडिक्कोडुत्त नाच्चियार कहलाती हैं, अपनी पहनी माला अर्पित करने वाली देवी, और आज भी श्रीविल्लिपुत्तूर में आण्डाळ की पहनी माला ब्रह्मोत्सव की गरुड़ सेवा के लिए तिरुमला ले जाई जाती है।

उन्होंने दो ग्रन्थ गाए। तिरुप्पावै तीस पाशुरों का है, जिसमें आयर्पाडि की कन्याएँ मार्गशीर्ष (मार्गऴि) मास में भोर से पहले उठती हैं, एक-दूसरे को जगाती हैं और कृष्ण के द्वार पर पऱै वाद्य माँगने जाती हैं, और अन्त में केवल इतना माँगती हैं कि हर जन्म में उनकी सेवा मिले। नाच्चियार तिरुमोऴि के 143 पदों में उनकी तड़प और विवाह का स्वप्न है। परंपरा कहती है कि श्रीरंगनाथ ने उन्हें बुलवाया और वे वधू बनकर गर्भगृह में गईं और उन्हीं में लीन हो गईं। हर श्रीवैष्णव घर और मन्दिर में मार्गऴि की भोर तिरुप्पावै से आरम्भ होती है।

रचनाएँ

  • तिरुप्पावै (30 पाशुर)
  • नाच्चियार तिरुमोऴि (143 पाशुर)

हर भजन

श्रीकृष्ण

मार्गऴित् तिङ्गळ् मदिनिऱैन्द नऩ्ऩाळाल् नीराडप् पोदुवीर् पोदुमिऩो नेरिऴैयीर्

तिरुप्पावै 1: मार्गऴि तिङ्गळ्

आण्डाळ (गोदा नाच्चियार) · तमिल
श्रीकृष्ण

वङ्गक् कडल्गडैन्द मादवऩैक् केसवऩैत् तिङ्गळ् तिरुमुगत्तुच् चेयिऴैयार् सॆऩ्ऱिऱैञ्जि

तिरुप्पावै 30: वङ्गक् कडल्

आण्डाळ (गोदा नाच्चियार) · तमिल
श्रीकृष्ण

सिऱ्ऱञ् जिऱुकाले वन्दुऩ्ऩैच् चेवित्तुऩ् पॊऱ्ऱामरै अडिये पोऱ्ऱुम् पॊरुळ्केळाय्

तिरुप्पावै 29: सिऱ्ऱम् सिऱु काले

आण्डाळ (गोदा नाच्चियार) · तमिल
श्रीकृष्ण

मायऩै मऩ्ऩु वडमदुरै मैन्दऩैत् तूय पॆरुनीर् यमुऩैत् तुऱैवऩै

तिरुप्पावै 5: मायऩै

आण्डाळ (गोदा नाच्चियार) · तमिल