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श्रीपेरुम्बुदूर

श्री रामानुजाचार्य की जन्मभूमि, श्रीवैष्णव गणना के अनुसार 1017 में यहाँ जन्मे। उनकी सन्निधि आदिकेशव पेरुमाल मंदिर के भीतर है, और यह नगर सम्प्रदाय के सबसे पवित्र स्थानों में है।

निर्माण: आदिकेशव पेरुमाल मंदिर, रामानुज के सन्निधि सहितस्थान: तमिलनाडु (कांचीपुरम ज़िला)देवता: भगवान विष्णु आदिकेशव पेरुमाल रूप में; श्री रामानुज12.97° N, 79.95° E
  1. 1017 ई. (श्रीवैष्णव परंपरा)
  2. 21 मई 1991
  3. 2017 ई.
चित्र: Destination8infinity · CC BY-SA 3.0

01भाष्यकार का घर

रामानुज का जन्म यहीं आसुरि केशव सोमयाजी और कान्तिमती के घर हुआ। आदिकेशव पेरुमाल मंदिर में उनकी अपनी सन्निधि है, जहाँ वे श्रीभाष्य के रचयिता भाष्यकार के रूप में पूजे जाते हैं। यहाँ उनकी उत्सव मूर्ति ‘तमर् उगन्द तिरुमेनि’ कहलाती है, यानी ‘जिस रूप को उनके अपने जनों ने चाहा’; सम्प्रदाय मानता है कि यह उनके जीवनकाल में बनी, और जन्मभूमि भेजे जाने से पहले उन्होंने इसका आलिंगन कर इसमें अपनी शक्ति डाली। चित्तिरै मास का उनका तिरुवादिरै नक्षत्र उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो वर्ष का सबसे बड़ा उत्सव है।

02आज का नगर

श्रीपेरुम्बुदूर चेन्नई से कांचीपुरम के पुराने मार्ग पर है, और पिछले तीस वर्षों में यह कारख़ानों का नगर बन गया है। 21 मई 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यहाँ एक चुनावी सभा में लिट्टे की आत्मघाती हमलावर ने हत्या कर दी; उस स्थान पर स्मारक है। 2017 में रामानुज की सहस्राब्दी जयंती पर लाखों तीर्थयात्री आए, और फ़रवरी 2022 में हैदराबाद के पास उनके सम्मान में ‘स्टैच्यू ऑफ़ इक्वैलिटी’ का अनावरण हुआ।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 1017 ई. (श्रीवैष्णव परंपरा)यहाँ रामानुजाचार्य का जन्म हुआ।
  2. 21 मई 1991यहाँ एक चुनावी सभा में राजीव गांधी की हत्या हुई।
  3. 2017 ई.रामानुज की सहस्राब्दी जयंती मनाई गई।
दर्शन और यात्रा

चेन्नई से लगभग 40 किमी पश्चिम; चित्तिरै (अप्रैल–मई) के तिरुवादिरै पर सबसे अधिक भीड़ होती है।