आज भी खड़ा

दैवनायकेश्वरर (चन्द्रशेखरर) मन्दिर, इलम्बैयंकोट्टूर

यहाँ शिव ने बालक सम्बन्दर को मार्ग में रोका, पहले बालक बनकर, फिर वृद्ध बनकर, फिर एक सफ़ेद गाय बनकर जो मन्दिर में चली गई। सम्बन्दर पीछे गए और गाया।

निर्माण: स्वयम्भू लिंग वाला पुराना ग्राम-मन्दिरस्थान: तमिलनाडु (कांचीपुरम ज़िला, श्रीपेरुम्बुदूर तालुका)देवता: भगवान शिव दैवनायकेश्वरर (अरम्बेश्वर, चन्द्रशेखरर) रूप में; देवी कनक कुजाम्बिका (तायिनुम नल्लाल)13.00° N, 79.81° E
चित्र: Ssriram mt · CC BY-SA 4.0

01सफ़ेद गाय

मन्दिर की कथा कहती है कि सम्बन्दर बिना रुके आगे बढ़ रहे थे, तो स्वामी पहले छोटे बालक और फिर वृद्ध बनकर उनके पास आए; सन्त ने तब भी न पहचाना तो वे सफ़ेद गाय बनकर धाम की ओर चले, और सम्बन्दर उसके पीछे भीतर गए और गाया। देवी का तमिल नाम तायिनुम नल्लाल है, माँ से भी अधिक दयालु। स्वामी अरम्बेश्वर हैं क्योंकि अपनी कान्ति खो चुकी अप्सराएँ रम्भा, उर्वशी और मेनका ने यहाँ पूजा की, और दैवनायकेश्वर इसलिए कि त्रिपुर के विरुद्ध निकलते समय उनकी जटा से एक कोन्ऱै फूल गिरा और यही स्वयम्भू लिंग बन गया।

दर्शन और यात्रा

चेन्नई के पश्चिम में श्रीपेरुम्बुदूर के पास; श्रीपेरुम्बुदूर या पेरम्बाक्कम से सड़क से पहुँचें।