आज भी खड़ा

सालासर बालाजी मन्दिर

शेखावाटी के रेतीले अंचल में हनुमान जी का मन्दिर, जो उस मूर्ति के चारों ओर बना जिससे 1754 में आसोटा गाँव में एक किसान का हल टकराया था। उत्तर भारत में हनुमान जी के सबसे अधिक दर्शन वाले धामों में यह एक है।

निर्माण: 1754 ई. (श्रावण शुक्ल नवमी, संवत 1811), सन्त मोहनदास के समयस्थान: राजस्थान (चूरू ज़िला)देवता: दाढ़ी-मूँछ वाले बालाजी रूप में श्री हनुमान27.72° N, 74.71° E
  1. 1754 (संवत 1811)
चित्र: Dausaanoop · CC BY-SA 4.0

01आसोटा का हल

मंगलवार, श्रावण शुक्ल नवमी को नागौर के आसोटा गाँव में हल चलाते एक जाट किसान को लगा कि फाल पत्थर से टकराया। खोदने पर बालाजी की मूर्ति निकली। पत्नी उसी समय खाना, बाजरे का चूरमा, लेकर आई थीं, और किसान ने वहीं भोग लगाया; तब से सालासर में चूरमा ही भोग है। उस रात बालाजी ने आसोटा के ठाकुर को और सालासर के भक्त मोहनदास को स्वप्न दिया, और मूर्ति बैलगाड़ी से सालासर लाई गई। जहाँ बैल रुके, वहीं मन्दिर बना।

02मोहनदास और दो मेले

मोहनदास महाराज जीवन भर मूर्ति की सेवा करते रहे, और उनकी जलाई धूनी आज भी जलती रखी जाती है। मूर्ति अनोखी है: यहाँ बालाजी का मुख गोल है, दाढ़ी-मूँछ के साथ, जैसा कहा जाता है कि मोहनदास ने उन्हें पहली बार देखा था। दो बड़े मेले लगते हैं, चैत्र पूर्णिमा को, जो उत्तर भारत की गणना में हनुमान जयन्ती है, और आश्विन पूर्णिमा को। मनौती के लिए भक्त परिसर के एक पेड़ पर लाल धागे से नारियल बाँधते हैं, और मुराद पूरी होने पर खोलने लौटते हैं।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 1754 (संवत 1811)आसोटा में मूर्ति मिलती है और सालासर में स्थापित होती है।
दर्शन और यात्रा

सालासर जयपुर–बीकानेर मार्ग पर सुजानगढ़ के पास है; सुजानगढ़ और सीकर निकटतम स्टेशन हैं। मंगलवार और शनिवार को भीड़ रहती है।