उत्खनित

मोहनजोदड़ो

सिन्धु–सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा नगर, सिन्ध में सिन्धु-तट पर, जिसमें महास्नानागार, पकी ईंटों की जाली-योजना वाली गलियाँ और ढकी नालियाँ हैं। काँसे की नर्तकी और योगी की वह मुहर जिसे अनेक लोग पशुपति मानते हैं, यहीं मिलीं।

निर्माण: लगभग 2500–1900 ई.पू., परिपक्व सिन्धु–सरस्वती नगरस्थान: सिन्ध (लरकाना ज़िला), पाकिस्तान, Pakistan27.33° N, 68.14° E
  1. लगभग 2500 ई.पू.
  2. लगभग 1900 ई.पू. के बाद
  3. 1922
  4. सितम्बर 1924
  5. 1964
  6. 1980
चित्र: Aakashaliraza · CC BY-SA 4.0

01मुर्दों का टीला

सिन्धी नाम का अर्थ है मुर्दों का टीला। आर. डी. बनर्जी 1922 में इसके शिखर के कुषाणकालीन स्तूप को देखने आए, और उसके नीचे हड़प्पा जैसी मुहरें पाईं। सितम्बर 1924 में जॉन मार्शल ने संसार को बताया कि सिन्धु घाटी में सुमेर जितनी पुरानी सभ्यता मिली है। 1920 के दशक में मार्शल, वत्स और मैके के अधीन उत्खनन चला। नगर लगभग 250 हेक्टेयर में फैला था: पश्चिम में ऊँचा दुर्ग-भाग, निचले नगर में सीधी गलियों से कटे खण्ड, कुओं और स्नानघरों वाले घर, और गलियों के नीचे बहती पकी ईंटों की नालियाँ। शायद चालीस हज़ार लोग यहाँ रहते थे।

02स्नानागार, मुहर और झूठा नरसंहार

दुर्ग-भाग पर महास्नानागार लगभग 12 गुणा 7 मीटर और 2.4 मीटर गहरा कुण्ड है, जिसकी ईंटें जिप्सम में जुड़ी और डामर से बन्द हैं, दोनों ओर उतरने की सीढ़ियाँ और चारों ओर कक्ष। अनेक लोग इसमें भारत का पहला पवित्र स्नान-कुण्ड देखते हैं, मन्दिर-कुण्ड का पूर्वज। पशुओं के बीच बैठे योगी की मुहर, काँसे की नर्तकी और पत्थर का ‘पुरोहित-राजा’ इन्हीं गलियों से निकले। 1947 में मोर्टिमर व्हीलर ने ऊपरी परतों के कुछ कंकालों को आक्रमणकारी आर्य सेना के शिकार माना और लिखा कि ‘इन्द्र अभियुक्त है’। 1964 में जॉर्ज डेल्स ने दिखाया कि हड्डियाँ अलग-अलग कालों की हैं और कोई नरसंहार हुआ ही नहीं। लगभग 1900 ई.पू. के बाद नदियों के मार्ग बदलने से नगर ढलता गया।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. लगभग 2500 ई.पू.पकी ईंटों का नियोजित नगर अपने चरम पर है।
  2. लगभग 1900 ई.पू. के बादनगर का ह्रास होता है और वह छोड़ दिया जाता है।
  3. 1922आर. डी. बनर्जी स्थल की पहचान करते हैं और हड़प्पाई मुहरें पाते हैं।
  4. सितम्बर 1924जॉन मार्शल सिन्धु सभ्यता की खोज की घोषणा करते हैं।
  5. 1964जॉर्ज डेल्स व्हीलर के ‘नरसंहार’ को असत्य सिद्ध करते हैं।
  6. 1980यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित।
दर्शन और यात्रा

सिन्ध में लरकाना से 28 किमी दक्षिण, स्थल संग्रहालय के साथ। नर्तकी राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में है; पुरोहित-राजा कराची में।

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