01धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे
गीता के पहले शब्द इसी भूमि का नाम लेते हैं। महाभारत कहता है कि राजा कुरु ने इसे सोने के हल से जोता और इन्द्र से वर पाया कि यहाँ मरने वाला स्वर्ग जाएगा; इसीलिए अठारह दिन का युद्ध यहीं हुआ। ज्योतिसर में, उस वटवृक्ष के नीचे जिसे उसी वृक्ष की सन्तान बताया जाता है, कृष्ण ने अर्जुन को विश्वरूप दिखाया। भीष्म नरकातारी में शर-शय्या पर लेटे, जहाँ अर्जुन ने धरती में बाण मारकर उनके लिए जल निकाला। कुरुक्षेत्र की 48 कोस परिक्रमा में सौ से अधिक तीर्थ हैं, जिनमें ब्रह्म सरोवर और सन्निहित सरोवर भी हैं, जहाँ सूर्यग्रहण पर लाखों स्नान करते हैं।
02थानेसर और 1014 का आक्रमण
स्थाण्वीश्वर, आज का थानेसर, प्रभाकरवर्धन और उनके पुत्र हर्ष की राजधानी था; हर्ष के दरबारी कवि बाणभट्ट ने हर्षचरित में इस नगर का वर्णन किया है। यहाँ का स्थाणेश्वर महादेव मन्दिर नगर का सबसे पुराना मन्दिर है। 1014 में महमूद ग़ज़नवी ने थानेसर पर धावा बोला। अल-बिरूनी लिखता है कि चक्रस्वामी, यानी चक्रधारी विष्णु, की धातु-प्रतिमा ग़ज़नी ले जाई गई और वहाँ के मैदान में फेंक दी गई। अब हर वर्ष मार्गशीर्ष में गीता जयन्ती के आसपास ब्रह्म सरोवर पर अन्तरराष्ट्रीय गीता महोत्सव होता है।
इस स्थान की जीवन-गाथा
- 606हर्ष स्थाण्वीश्वर में राजा बनते हैं।
- 1014महमूद ग़ज़नवी थानेसर लूटता है और चक्रस्वामी प्रतिमा ले जाता है (अल-बिरूनी)।
ज्योतिसर कुरुक्षेत्र नगर से 5 किलोमीटर है; ब्रह्म सरोवर पर सन्ध्या आरती होती है। श्रीकृष्ण संग्रहालय और कुरुक्षेत्र पैनोरमा सरोवर के पास हैं।






