01पटकाई के पार
अहोम राजाओं द्वारा बड़े यत्न से रखे गए दरबारी इतिहास, ‘बुरंजी’, बताते हैं कि सुकाफा मोंग माओ के ताई राजकुमार थे, जो सरदारों, सैनिकों और परिवारों के साथ अपनी भूमि छोड़कर निकले और वर्षों की यात्रा के बाद 1228 में पटकाई पर्वतमाला पार कर घाटी में आए। जिन लोगों को उन्होंने वहाँ पाया उन्हें भगाया नहीं। मोरान और बोराही कुलों में विवाह-संबंध किए, उन्हें अपने राज्य में मिलाया, और ब्रह्मपुत्र के मैदान में धान की खेती अपनाई। लगभग 1253 में उन्होंने चराइदेव को राजधानी बनाया, जहाँ अहोम राजाओं के मिट्टी के टीलों वाले समाधि-स्थल, ‘मैदाम’, आज भी हैं।
02छह शताब्दियाँ
सुकाफा द्वारा स्थापित राज्य ऊपरी घाटी से बढ़ता हुआ लगभग पूरे ब्रह्मपुत्र मैदान तक फैल गया। शताब्दियों में अहोम राजाओं ने हिंदू धर्म और संस्कृत नाम अपनाए, शिवसागर के शिव और देवी मंदिर बनवाए और सत्रों को भूमि दी। उन्होंने बंगाल और मुग़लों की सेनाओं को अनेक बार लौटाया, सबसे प्रसिद्ध रूप से 1671 में सराईघाट में। असम 2 दिसंबर को ‘असम दिवस’, सुकाफा दिवस, के रूप में मनाता है। 2024 में चराइदेव के मैदाम यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में आए।




