आज भी खड़ा

शिवदौल, शिवसागर

अहोम राजधानी रंगपुर का ऊँचा शिव मन्दिर, जो 1734 ई. में शिवसागर के विशाल सरोवर के तट पर बना, और जिसके पास विष्णु तथा देवी के मन्दिर हैं।

निर्माण: 1734 ई., अहोम राजा शिव सिंह की रानी बड़ राजा अम्बिकास्थान: असमदेवता: भगवान शिव26.99° N, 94.64° E
  1. 1734 ई.
चित्र: Neelav Kashyap · CC BY-SA 4.0

01रानी का सरोवर

शिव सिंह (शासन 1714–1744 ई.) ने अपनी पटरानी फुलेश्वरी को अपने नाम से शासिका बनाया, जिन्हें बड़ राजा कहा गया, और उनके निधन के बाद रानी अम्बिका ने वही पद पाया। अम्बिका ने 1734 ई. में विशाल सरोवर खुदवाया और उसके दक्षिणी तट पर तीन मन्दिर बनवाए: बीच में शिवदौल, दोनों ओर विष्णुदौल और देवीदौल। सरोवर से ही नगर का नाम पड़ा, शिवसागर, अर्थात शिव का सागर। शिवदौल लगभग 32 मीटर ऊँचा है और शिखर पर सोने का कलश चमकता है।

02अहोम मन्दिर शैली

अहोम कारीगरों ने ईंट से काम किया, कहीं-कहीं पत्थर का आवरण दिया, और असमिया चाला रूप के झोंपड़ीनुमा मण्डप पर घुमावदार नागर शिखर बिठाया। बाहरी दीवारों पर देवी के रूपों और विष्णु के अवतारों की मूर्तियाँ हैं। महाशिवरात्रि पर ऊपरी असम की सबसे बड़ी भीड़ यहीं जुटती है। बिहू के खेल देखने का अहोम राजमण्डप रंगघर और तलातल घर महल पास ही हैं।

इस स्थान की जीवन-गाथा

  1. 1734 ई.रानी अम्बिका शिवदौल, विष्णुदौल, देवीदौल बनवाती हैं और शिवसागर सरोवर खुदवाती हैं।
दर्शन और यात्रा

शिवसागर नगर में, गुवाहाटी से 360 किमी पूर्व; निकटतम बड़ा रेल जंक्शन सिमलुगुड़ी है।