चित्र: Uttar Pradesh state archives · Public domain
स्वतंत्रता सेनानी

राम प्रसाद बिस्मिल

कवि-क्रांतिकारी, काकोरी कांड के नेता

1897 ई.—1927 ई.

11 जून 1897 – 19 दिसंबर 1927

आर्य समाजी, कवि और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापक, जिन्होंने 1925 में काकोरी में ट्रेन से सरकारी ख़ज़ाना छीनने का नेतृत्व किया। 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर में उन्हें फाँसी दी गई।

01शाहजहाँपुर और मैनपुरी

उनका जन्म शाहजहाँपुर में हुआ और बचपन में वे आर्य समाज के प्रभाव में आए; स्वामी दयानंद का ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पढ़ा और ब्रह्मचर्य तथा नित्य व्यायाम अपनाया। वे ‘बिस्मिल’, ‘राम’ और ‘अज्ञात’ नामों से हिंदी और उर्दू में कविता लिखते थे। 1918 में उन्होंने और गेंदालाल दीक्षित ने ‘मातृवेदी’ संगठन खड़ा किया, जो मैनपुरी षड्यंत्र केस में टूट गया; बिस्मिल दो वर्ष भूमिगत रहे। 1924 में शचींद्रनाथ सान्याल और अन्य साथियों के साथ उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन बनाई, जिसका लक्ष्य सशस्त्र क्रांति से संघीय गणराज्य पाना था।

02काकोरी और गोरखपुर जेल

9 अगस्त 1925 को उन्होंने और साथियों ने लखनऊ के पास काकोरी में 8 डाउन ट्रेन रोकी और गार्ड के डिब्बे से सरकारी ख़ज़ाने के थैले उतार लिए। 26 सितंबर से गिरफ़्तारियाँ शुरू हुईं। एक वर्ष से अधिक चले मुक़दमे के बाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ुल्ला ख़ान, रोशन सिंह और राजेंद्र लाहिड़ी को मृत्युदंड मिला। राजेंद्र लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 को गोंडा में फाँसी हुई; 19 दिसंबर को बिस्मिल को गोरखपुर, अशफ़ाक़ुल्ला को फ़ैज़ाबाद और रोशन सिंह को इलाहाबाद में। फाँसी से पहले के दिनों में उन्होंने अपनी आत्मकथा पूरी की, जो छिपाकर जेल से बाहर पहुँचाई गई। आर्य समाजी बिस्मिल और पठान अशफ़ाक़ुल्ला की मित्रता उत्तर प्रदेश आज भी याद करता है।

शाहजहाँपुर
स्थान · 1647 में अफ़ग़ान सरदार दिलेर ख़ान और बहादुर ख़ान ने बसायाशाहजहाँपुरगर्रा नदी के किनारे रुहेलखण्ड का नगर, राम प्रसाद बिस्मिल और उनके साथी अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ की जन्मभूमि। काकोरी कांड के लिए फाँसी पाए चार में से तीन वीर इसी नगर और ज़िले के थे।पढ़ें →